बूझमाड़ में ढहा माओवाद का 'अंतिम किला': कुमनार में सुरक्षा कैंप स्थापित; अब बीजापुर से सीधा जुड़ेगा नारायणपुर

बूझमाड़ में ढहा माओवाद का 'अंतिम किला': कुमनार में सुरक्षा कैंप स्थापित; अब बीजापुर से सीधा जुड़ेगा नारायणपुर

12, 2, 2026

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर पुलिस ने दशकों से नक्सलियों के अभेद्य गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ के हृदय स्थल कुमनार में नया सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित कर एक बड़ी रणनीतिक जीत हासिल की है। 'माड़ बचाओ' अभियान के तहत स्थापित यह कैंप वर्ष 2026 का 8वां और इस क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण सामरिक पड़ाव है। इस कैंप की स्थापना के साथ ही अब नारायणपुर के ओरछा से बीजापुर के भैरमगढ़ तक की सीधी कनेक्टिविटी का रास्ता साफ हो गया है।

नक्सली साम्राज्य का खात्मा: कुमनार वही इलाका है जहाँ कभी माओवादी सेंट्रल कमेटी का समानांतर शासन चलता था। यह वही दुर्गम क्षेत्र है जहाँ सुरक्षाबलों ने कुख्यात नक्सली बसवा राजू को ढेर कर संगठन की कमर तोड़ दी थी। अब नारायणपुर पुलिस, डीआरजी (DRG), बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी (ITBP) की छह वाहिनियों के संयुक्त प्रयासों से इस इलाके में तिरंगा शान से लहरा रहा है, जो दशकों के आतंक के अंत का प्रतीक है।

विकास की नई जीवन रेखा: जिला मुख्यालय से 102 किमी दूर स्थित इस कैंप के माध्यम से लेकवाडा, नेडअट्टे और डोडूम जैसे आधा दर्जन गांवों तक लोकतंत्र की बुनियादी सुविधाएं पहुँचेंगी।

  • कनेक्टिविटी: ओरछा-कुमनार-भैरमगढ़ सड़क और पुल-पुलिया निर्माण में अब तेज़ी आएगी।

  • सुविधाएं: दशकों से कटे हुए इन गांवों में अब शिक्षा (स्कूल), चिकित्सा (अस्पताल) और मोबाइल नेटवर्क की सुलभ पहुँच होगी।

  • सुरक्षा: बस्तर आईजी पी. सुंदरराज और एसपी रोबिनसन गुरिया के नेतृत्व में यह अभियान अबूझमाड़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने की दिशा में अंतिम प्रहार माना जा रहा है।


मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: अबूझमाड़ और बीजापुर (भैरमगढ़) के बीच सीधी सड़क कनेक्टिविटी बहाल।

  • सामरिक महत्व: वर्ष 2026 का 8वां और क्षेत्र का अंतिम सामरिक कैंप।

  • संयुक्त बल: पुलिस, DRG, बस्तर फाइटर्स और ITBP की 6 बटालियनों की सक्रिय भूमिका।

  • लक्ष्य: 31 मार्च 2026 की समयसीमा से पहले क्षेत्र को नक्सल मुक्त करना।

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