छत्तीसगढ़ में 'अवैध धर्मांतरण' पर सर्जिकल स्ट्राइक: विधानसभा में सख्त कानून पारित; सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास का प्रावधान
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छत्तीसगढ़ में 'अवैध धर्मांतरण' पर सर्जिकल स्ट्राइक: विधानसभा में सख्त कानून पारित; सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास का प्रावधान

12, 2, 2026

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा पेश किए गए इस विधेयक पर करीब 5 घंटे की गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस कानून को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब प्रदेश के आदिवासियों, पिछड़ों और गरीबों की अज्ञानता का लाभ उठाकर उन्हें प्रलोभन देने वालों की खैर नहीं होगी।

कानून के प्रमुख और कड़े प्रावधान: यह नया कानून अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए देश के सबसे सख्त कानूनों में से एक माना जा रहा है:

  1. कठोर सजा: सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।

  2. विशेष वर्गों का संरक्षण: नाबालिगों, महिलाओं, दिव्यांगों, SC/ST और OBC वर्ग के व्यक्तियों का जबरन धर्मांतरण कराने पर 20 साल तक की जेल हो सकती है।

  3. अनिवार्य सूचना: धर्मांतरण कराने वाले और होने वाले, दोनों पक्षों को अब जिला प्रशासन (प्राधिकृत अधिकारी) को पूर्व सूचना देनी होगी।

  4. सख्त जांच: सूचना मिलने पर अधिकारी एक माह के भीतर जांच करेंगे कि कहीं यह कदम किसी भय, लालच या दबाव में तो नहीं उठाया गया है। संतुष्टि के बाद ही अनुमति मिलेगी।

  5. गैर-जमानती अपराध: छल-कपट या डिजिटल माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना अब संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा।

राजनीतिक घमासान और बहिष्कार: विधेयक पेश होने के दौरान सदन में भारी हंगामा भी देखने को मिला। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस विधेयक को 'प्रवर समिति' (Select Committee) भेजने की मांग की थी। मांग पूरी न होने पर कांग्रेस सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया और चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि विवाह की आड़ में होने वाले धर्मांतरण के दुरुपयोग पर भी अब पूर्ण विराम लग जाएगा।

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