बस्तर में 'पापाराव' का सरेंडर और 'क्रेडिट' का घमासान: गृहमंत्री की दो टूक— "31 मार्च कोई हैप्पी न्यू ईयर नहीं, खात्मा जारी रहेगा

बस्तर में 'पापाराव' का सरेंडर और 'क्रेडिट' का घमासान: गृहमंत्री की दो टूक— "31 मार्च कोई हैप्पी न्यू ईयर नहीं, खात्मा जारी रहेगा

12, 2, 2026

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बस्तर के जंगलों में दशकों तक समानांतर सत्ता चलाने वाले दुर्दांत नक्सल कमांडर पापाराव का 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। इस सरेंडर के साथ ही अब बस्तर में कोई भी 'बड़ा चेहरा' सक्रिय नहीं बचा है। हालांकि, इस कामयाबी ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है।

सरकार का आक्रामक रुख: डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष के "31 मार्च के बाद क्या?" वाले सवाल पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 31 मार्च की रात कोई 'हैप्पी न्यू ईयर' की पार्टी नहीं है, बल्कि यह नक्सलवाद के पूर्ण सफाए की एक निरंतर प्रक्रिया है। गृहमंत्री ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि:

  • पिछले 2 वर्षों में 8,000 नक्सलियों के संगठन को ध्वस्त किया गया है।

  • 550 से अधिक नक्सली मुठभेड़ में मारे गए हैं।

  • सरकार अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाली नहीं है।

कांग्रेस की 'क्रेडिट' वाली कसक: विपक्ष की ओर से पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने मोर्चा संभालते हुए सरकार को नसीहत दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नक्सलवाद के खात्मे का कुछ श्रेय तो कांग्रेस सरकार को भी मिलना चाहिए, क्योंकि नींव उनके समय में रखी गई थी। डहरिया का तर्क है कि देश और प्रदेश कांग्रेस की नीतियों के भरोसे ही चल रहा है।

राजनीतिक प्रेक्षकों का विश्लेषण: जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी दुविधा यह है कि जो समस्या दशकों से नासूर बनी हुई थी, उसका समाधान अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। विपक्ष को डर है कि इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल जाएगा, यही कारण है कि शंकाओं और सवालों के जरिए 'क्रेडिट' में हिस्सेदारी की कोशिश की जा रही है।

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