छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति (1 अप्रैल से प्रभावी): देशी शराब के दाम स्थिर; महंगी शराब पर बढ़ा टैक्स; ₹1300 करोड़ अतिरिक्त राजस्व का लक्ष्य
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छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति (1 अप्रैल से प्रभावी): देशी शराब के दाम स्थिर; महंगी शराब पर बढ़ा टैक्स; ₹1300 करोड़ अतिरिक्त राजस्व का लक्ष्य

12, 2, 2026

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1. देशी शराब: राहत और 'राउंड ऑफ' का गणित

  • कीमतें यथावत: डिस्टिलरी कंपनियों ने इस साल रेट कोट पिछले साल की तुलना में कम दिया है। सरकार को एक पेटी पर ₹75 की बचत होगी।

  • उपभोक्ता को लाभ क्यों नहीं? सरकार ने इस बचत का लाभ 'राउंड ऑफ प्राइस' (कीमत को पूर्णांक में रखने) के जरिए अपने पास रखने का निर्णय लिया है।

  • राजस्व: जानकारों के मुताबिक, केवल इस 'राउंड ऑफ' फार्मूले से प्रदेश सरकार को करीब ₹1300 करोड़ की अतिरिक्त कमाई होने की उम्मीद है।

2. विदेशी और प्रीमियम शराब: 'जितनी महंगी, उतना टैक्स'

  • स्लैब आधारित ड्यूटी: नई अधिसूचना के अनुसार, अब शराब की कीमत के आधार पर ड्यूटी तय होगी।

  • प्रीमियम ब्रांड्स: हाई-एंड और लग्जरी ब्रांड्स पर ड्यूटी बढ़ा दी गई है, जिससे विदेशी शराब की कीमतों में इजाफा होना तय है।

  • बीयर और RTD: बीयर और 'रेडी-टू-ड्रिंक' पेय पदार्थों पर भी संशोधित (बढ़ी हुई) दरें लागू होंगी।

3. कड़े नियम और सेना को राहत

  • एडवांस ड्यूटी: अब शराब की सप्लाई से पहले ही ड्यूटी टैक्स का भुगतान अनिवार्य कर दिया गया है। बिना टैक्स चुकाए शराब दुकान तक नहीं पहुँचेगी।

  • डिफेंस कोटा: सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए न्यूनतम ड्यूटी दरें तय की गई हैं, ताकि उन्हें वाजिब दामों पर आपूर्ति मिलती रहे।

  • अहाता और बार नीति: नई नीति में दुकानों के संचालन और अहातों (शराब पीने के स्थान) के लिए कड़े मापदंड तय किए गए हैं।

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