छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मूक-बधिर पीड़िता के 'इशारों' को माना पुख्ता सबूत; प्लास्टिक की गुड़िया ने दिलाई दरिंदे को 'मरते दम तक' उम्रकैद
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मूक-बधिर पीड़िता के 'इशारों' को माना पुख्ता सबूत; प्लास्टिक की गुड़िया ने दिलाई दरिंदे को 'मरते दम तक' उम्रकैद

12, 2, 2026

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अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी:

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए स्पष्ट रूप से कहा:

"केवल मूक-बधिर होने के आधार पर किसी गवाह की बात को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों और इशारों (Sign Language) के माध्यम से दी गई जानकारी को भी कानूनन 'मौखिक साक्ष्य' (Oral Evidence) की श्रेणी में माना जाता है।"

मामले की पृष्ठभूमि और दरिंदगी:

यह मामला बालोद जिले का है, जहाँ एक मूक-बधिर युवती घर में अकेली थी। उसका रिश्तेदार नीलम कुमार देशमुख घर में जबरन घुसा और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अपनी मां के लौटने पर इशारों में पूरी आपबीती सुनाई और आरोपी की पहचान की, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।

ट्रायल कोर्ट में 'प्लास्टिक की गुड़िया' का अनोखा प्रयोग:

चूँकि पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी, इसलिए कोर्ट के सामने गवाही दर्ज कराना चुनौतीपूर्ण था। ट्रायल कोर्ट ने एक संवेदनशील रास्ता अपनाया:

  • साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट: गवाही के दौरान विशेषज्ञ की मदद ली गई।

  • डेमोंस्ट्रेशन: जब शब्दों के अभाव में घटना को स्पष्ट करने में कठिनाई हुई, तो कोर्ट ने प्लास्टिक की गुड़िया मंगवाई।

  • साक्ष्य: पीड़िता ने उस गुड़िया के माध्यम से संकेतों द्वारा प्रदर्शित किया कि आरोपी ने उसके साथ किस तरह की क्रूरता की थी।

हाईकोर्ट का कड़ा फैसला:

आरोपी ने ट्रायल कोर्ट की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह भरोसेमंद है और मेडिकल/फॉरेंसिक रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि करती है।

सजा का विवरण:

  1. धारा 376(2) IPC: 'मरते दम तक' (Natural Life) उम्रकैद की सजा।

  2. धारा 450 IPC: घर में अवैध प्रवेश के लिए 5 साल की जेल।

  3. जुर्माना: 21 हजार रुपये का अर्थदंड।

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