ट्राइबल गेम्स में 'सिस्टम' की शर्मनाक चूक: बीजापुर के तैराक बिना पानी के 'सूखे पूल' में करते रहे प्रैक्टिस; नेशनल गेम्स में उतरीं तो घबराईं प्रतिभाएं

ट्राइबल गेम्स में 'सिस्टम' की शर्मनाक चूक: बीजापुर के तैराक बिना पानी के 'सूखे पूल' में करते रहे प्रैक्टिस; नेशनल गेम्स में उतरीं तो घबराईं प्रतिभाएं

12, 2, 2026

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राजधानी रायपुर के इंटरनेशनल स्विमिंग पूल में जब बीजापुर के आदिवासी खिलाड़ी प्रतियोगिता के लिए उतरे, तो उनकी घबराहट ने सबको चौंका दिया। जांच करने पर जो सच्चाई सामने आई, वह खेल विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

बिना पानी के कैसे बनी 'जलपरी'? खिलाड़ियों और कोच दीप्ति वर्मा के अनुसार, बीजापुर का स्विमिंग पूल पिछले 5 महीनों से खाली पड़ा है। नेशनल स्तर की इतनी बड़ी प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों को पानी में अभ्यास कराने के बजाय 'सूखे पूल' के किनारे केवल पीटी (एक्सरसाइज) कराई गई। जब ये खिलाड़ी पहली बार रायपुर के गहरे और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले पूल में उतरे, तो वे पानी की गहराई देखकर सहम गए, जिसका सीधा असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा।

डाइट के नाम पर केवल 'अंडा-केला': लापरवाही सिर्फ अभ्यास तक सीमित नहीं रही, बल्कि खिलाड़ियों के पोषण के साथ भी खिलवाड़ किया गया। कोच ने खुलासा किया कि नेशनल गेम्स की तैयारी कर रहे इन एथलीटों को उचित स्पोर्ट्स डाइट के बजाय केवल अंडा और केला दिया जा रहा था। बिना पर्याप्त कैलोरी और प्रोटीन के इन खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद करना बेमानी है।

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