रायपुर में मीराबाई चानू: "एशियन गेम्स का मेडल मेरा सबसे बड़ा अधूरा सपना"; खेलों के महाकुंभ में जनजातीय प्रतिभाओं को सराहा

रायपुर में मीराबाई चानू: "एशियन गेम्स का मेडल मेरा सबसे बड़ा अधूरा सपना"; खेलों के महाकुंभ में जनजातीय प्रतिभाओं को सराहा

12, 2, 2026

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1. एशियन गेम्स: एक 'अधूरा' मिशन

31 वर्षीय मीराबाई चानू ने स्वीकार किया कि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में सफलता के बावजूद एशियाई खेलों (Asian Games) का पदक उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • इतिहास: 2014 में वे 9वें स्थान पर रहीं, 2018 में पीठ की चोट और 2022 में हिप की चोट के कारण वे पोडियम (पदक) तक नहीं पहुँच सकीं।

  • चुनौती: उन्हें दो अलग-अलग भार वर्गों के बीच संतुलन बनाना होगा।

    • ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स (23 जुलाई - 2 अगस्त): 48 किलोग्राम वर्ग।

    • नागोया एशियन गेम्स (19 सितंबर - 4 अक्टूबर): 49 किलोग्राम वर्ग।

2. शानदार फॉर्म और राष्ट्रीय रिकॉर्ड

हाल ही में राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में मीराबाई ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए तीन नए नेशनल रिकॉर्ड बनाए हैं:

  • स्नैच: 89 किलोग्राम।

  • क्लीन एंड जर्क: 116 किलोग्राम।

  • कुल: 205 किलोग्राम (स्वर्ण पदक)। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि वे एशियन गेम्स की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


3. 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' पर विचार

मीराबाई ने रायपुर में हो रहे इस आयोजन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा:

  • मंच की महत्ता: उत्तर-पूर्व और देश के जनजातीय इलाकों में प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच की जरूरत है, जो यह प्रतियोगिता प्रदान कर रही है।

  • प्रशिक्षण और सुविधाएं: उन्होंने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) और साई (SAI) केंद्रों में मिल रहे उच्चस्तरीय पोषण और प्रशिक्षण को भारतीय खेलों के 'स्वर्ण युग' की शुरुआत बताया।

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