छत्तीसगढ़ विधानसभा में 'गलत जवाब' पर बवाल: जैतू साव मठ के ₹30.75 लाख मुआवजे का सच; अधिकारियों के दावे और बैंक स्टेटमेंट में बड़ा अंतर
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में 'गलत जवाब' पर बवाल: जैतू साव मठ के ₹30.75 लाख मुआवजे का सच; अधिकारियों के दावे और बैंक स्टेटमेंट में बड़ा अंतर

12, 2, 2026

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विधानसभा के चालू सत्र के दौरान एक विधायक द्वारा जैतू साव मठ को दी गई मुआवजा राशि के संबंध में सवाल पूछा गया था। विभागीय अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए लिखित जवाब में यह दावा किया गया कि:

  • दावा: 2 फरवरी 2023 को ₹30.75 लाख की राशि RTGS के माध्यम से ट्रस्ट के खाते में जमा कर दी गई है।

  • हकीकत: जब इस दावे की पड़ताल की गई, तो ट्रस्ट के सचिव ने स्पष्ट किया कि उन्हें फूटी कौड़ी भी प्राप्त नहीं हुई है।

प्रशासनिक चूक या गंभीर लापरवाही?

इस मामले के गंभीर होने के पीछे मुख्य रूप से तीन तकनीकी विसंगतियां सामने आई हैं:

  1. बैंक स्टेटमेंट: ट्रस्ट के आधिकारिक बैंक रिकॉर्ड में उक्त तिथि या उसके बाद ऐसी किसी बड़ी राशि का कोई क्रेडिट (जमा) उल्लेख नहीं है।

  2. गलत हलफनामा: विधानसभा में दिया गया जवाब एक आधिकारिक दस्तावेज होता है; इसमें गलत जानकारी देना 'विशेषाधिकार हनन' (Breach of Privilege) की श्रेणी में आता है।

  3. सत्यापन का अभाव: अधिकारियों ने बिना बैंक कंफर्मेशन या यूटीआर (UTR) नंबर की पुष्टि किए सदन को गुमराह करने वाला उत्तर तैयार किया।


विपक्ष का कड़ा रुख:

विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि सदन के भीतर ही सरकार गलत आंकड़े पेश कर रही है, तो धरातल पर योजनाओं की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

संभावित कार्रवाई:

  • संबंधित विभाग के सचिव और उत्तर तैयार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी हो सकता है।

  • मुख्यमंत्री सचिवालय इस मामले में दोषी अधिकारियों पर निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई कर सकता है।

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