छत्तीसगढ़ की जेलों में 'मौत का तांडव': 4 साल में 285 कैदियों ने तोड़ा दम; NHRC ने मुख्य सचिव और DG जेल को जारी किया नोटिस

छत्तीसगढ़ की जेलों में 'मौत का तांडव': 4 साल में 285 कैदियों ने तोड़ा दम; NHRC ने मुख्य सचिव और DG जेल को जारी किया नोटिस

12, 2, 2026

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1. NHRC की गंभीर टिप्पणी और नोटिस:

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर छत्तीसगढ़ सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। आयोग ने मुख्य सचिव (CS) और जेल महानिदेशक (DG Jail) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

2. रिपोर्ट में इन 5 प्रमुख बिंदुओं पर मांगी जानकारी:

आयोग ने राज्य सरकार से निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत हलफनामा पेश करने को कहा है:

  • ओवरक्राउडिंग (Overcrowding): जेलों की निर्धारित क्षमता कितनी है और वर्तमान में वहां कितने कैदी रखे गए हैं? (ज्यादा भीड़ होने से बीमारियां तेजी से फैलती हैं)।

  • चिकित्सकों के रिक्त पद: जेलों में स्वीकृत डॉक्टरों के कितने पद खाली हैं और वर्तमान में कैदियों की देखभाल कौन कर रहा है?

  • मौत के कारण: 285 कैदियों की मौत के पीछे प्राथमिक कारण क्या थे? क्या उन्हें समय पर इलाज मिला?

  • स्वास्थ्य सुविधाएं: जेल अस्पतालों की वर्तमान स्थिति और वहां उपलब्ध जीवन रक्षक दवाओं/उपकरणों का ब्यौरा।

  • भविष्य की कार्ययोजना: जेलों में मौतों के सिलसिले को रोकने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है?


3. जेलों की वर्तमान स्थिति (एक नजर में):

छत्तीसगढ़ की जेलें लंबे समय से अपनी क्षमता से अधिक कैदियों को रखने के कारण दबाव में हैं। आंकड़ों के अनुसार:

  • क्षमता बनाम कैदी: कई केंद्रीय जेलों में क्षमता से 1.5 से 2 गुना अधिक कैदी बंद हैं।

  • बीमारियां: टीबी (TB), त्वचा रोग और मानसिक तनाव कैदियों में मौत के प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं।

  • डॉक्टरों की कमी: अधिकांश जिला और उप-जेलों में नियमित डॉक्टरों के बजाय संविदा या अंशकालिक चिकित्सा सहायकों के भरोसे काम चल रहा है।

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