रायपुर में चमकीं अंजलि मुंडा: वैन चालक की बेटी बनीं 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की पहली महिला गोल्ड मेडलिस्ट; तैराकी में रचा इतिहास

रायपुर में चमकीं अंजलि मुंडा: वैन चालक की बेटी बनीं 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की पहली महिला गोल्ड मेडलिस्ट; तैराकी में रचा इतिहास

12, 2, 2026

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1. स्वर्णिम सफलता (The Golden Moment):

ओडिशा के जाजपुर जिले के छोटे से गांव गहिरागड़िया की रहने वाली अंजलि ने 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में अपनी रफ़्तार का जलवा बिखेरा। उन्होंने मात्र 2:39.02 सेकंड का समय निकालकर सोने का तमगा अपने नाम किया।

2. संघर्ष से सफलता का सफर:

अंजलि की कहानी अभावों के बीच पले-बढ़े उन करोड़ों बच्चों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं:

  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: अंजलि चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता एक स्थानीय फैक्ट्री में वैन चालक हैं।

  • शिक्षा और प्रशिक्षण: 10 साल की उम्र में वे भुवनेश्वर के कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (KISS) से जुड़ीं, जहाँ उन्हें मुफ्त शिक्षा और विश्वस्तरीय तैराकी प्रशिक्षण मिला।

  • संयोग से शुरुआत: 2022 में स्कूल में खेल चयन के दौरान उन्होंने तैराकी को चुना, जिसे वे पहले सिर्फ मनोरंजन मानती थीं।


3. 'अस्मिता लीग' ने बदला जीवन:

अंजलि अपनी सफलता का श्रेय भारत सरकार के खेल मंत्रालय की 'अस्मिता लीग' पहल को देती हैं।

  • 2024 (संभलपुर): यहाँ उन्होंने दो रजत पदक जीते, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।

  • गुवाहाटी (ईस्ट जोन): यहाँ भी दो रजत पदक जीतकर उन्होंने साबित किया कि वे लंबी रेस का घोड़ा हैं।


4. आगामी लक्ष्य (Future Goals):

स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी अंजलि संतुष्ट नहीं हैं। वे अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 2:25 सेकंड को और बेहतर करना चाहती हैं। उनकी नजर अब इन स्पर्धाओं पर है:

  • 50 मीटर और 100 मीटर बैकस्ट्रोक।

  • 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली।

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