होर्मुज संकट: भारत का 'नौवहन स्वतंत्रता' पर जोर; विदेश सचिव बोले— "कूटनीति ही एकमात्र रास्ता"
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होर्मुज संकट: भारत का 'नौवहन स्वतंत्रता' पर जोर; विदेश सचिव बोले— "कूटनीति ही एकमात्र रास्ता"

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में की गई आंशिक नाकेबंदी ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला को हिला कर रख दिया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर अत्यधिक निर्भर है, अब सक्रिय कूटनीति के जरिए अपने हितों की रक्षा कर रहा है।

1. विदेश सचिव विक्रम मिसरी के संबोधन के मुख्य बिंदु:

  • ऊर्जा सुरक्षा पर प्रहार: मिसरी ने स्पष्ट किया कि इस संकट का सबसे सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है।

  • नाविकों का बलिदान: उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में अपने नाविकों (Sailors) को खोया है।

  • वैश्विक सिद्धांत: भारत ने 'अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से निर्बाध आवागमन' और 'नौवहन की स्वतंत्रता' (Freedom of Navigation) के सिद्धांतों को सर्वोपरि बताया।

  • समाधान: संकट से निकलने के लिए उन्होंने तनाव कम करने और सभी पक्षों के बीच संवाद (Dialogue) की आवश्यकता पर बल दिया।


2. होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व (The Strategic Bottleneck):

यह संकरा जलमार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है:

  • तेल व गैस प्रवाह: विश्व के कुल तेल और एलएनजी (LNG) का लगभग 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है।

  • भारत का हित: पश्चिम एशिया भारत के लिए कच्चे तेल और गैस का सबसे बड़ा स्रोत है। इस मार्ग के अवरुद्ध होने से भारत में ईंधन की कीमतों में उछाल का खतरा बढ़ गया है।


3. विदेश मंत्रालय (MEA) की अपडेट: "6 भारतीय जहाज सुरक्षित निकले"

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में राहत भरी जानकारी साझा की:

  • सफल कूटनीति: पिछले कुछ दिनों में ईरान और अन्य संबंधित पक्षों से हुई निरंतर बातचीत का सकारात्मक परिणाम मिला है।

  • सुरक्षित पारगमन: भारतीय ध्वज वाले छह वाणिज्यिक जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सक्षम रहे हैं।

  • निरंतर संपर्क: भारत सरकार एलपीजी और एलएनजी ले जाने वाले अन्य जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान के साथ लगातार संपर्क में है। ईरान ने वर्तमान में अपने 'मित्र देशों' के जहाजों को निकलने की अनुमति दी है।


निष्कर्ष:

भारत इस संकट में एक 'संतुलनकारी शक्ति' (Balancing Power) के रूप में उभर रहा है। एक ओर जहाँ वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री सुरक्षा की वकालत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक और मित्रवत संबंधों का उपयोग करके अपने व्यापारिक जहाजों का सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित कर रहा है।

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