असम चुनाव 2026: नितिन गडकरी का 'धर्मशाला' वाला बयान और 3 साल में 'अमेरिकी' सड़कों का वादा
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असम चुनाव 2026: नितिन गडकरी का 'धर्मशाला' वाला बयान और 3 साल में 'अमेरिकी' सड़कों का वादा

12, 2, 2026

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गुवाहाटी (2 अप्रैल 2026): भाजपा उम्मीदवार हिमांशु शेखर बैश्य और विजय कुमार गुप्ता के समर्थन में आयोजित रैलियों में गडकरी ने घुसपैठियों और शरणार्थियों के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया।

1. "भारत धर्मशाला नहीं बन सकता": घुसपैठ बनाम शरण

  • साझी विरासत: गडकरी ने तर्क दिया कि पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन) की साझी विरासत और संस्कृति भारत से जुड़ी है। उनके पास भारत के अलावा कोई दूसरा देश नहीं है, इसलिए उन्हें आश्रय देना संवैधानिक "मार्गदर्शन" के अनुरूप है।

  • अवैध घुसपैठ: उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अवैध रूप से प्रवेश करने वाले विदेशी नागरिकों को नागरिकता या मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता। यदि ऐसा किया गया, तो भारत एक "धर्मशाला" बनकर रह जाएगा, जिससे स्थानीय नागरिकों के अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे।

  • पंथनिरपेक्षता: उन्होंने कहा कि भारत का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप किसी विचारधारा की देन नहीं, बल्कि "हिंदू संस्कृति" का परिणाम है जो सभी के लिए शांति की कामना करती है।


2. इन्फ्रास्ट्रक्चर: "असम की सड़कें अमेरिका जैसी होंगी"

अपनी कार्यशैली के लिए प्रसिद्ध गडकरी ने असम के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक बड़ी समयसीमा (Deadline) तय की:

  • 3 साल का लक्ष्य: उन्होंने वादा किया कि अगले 3 वर्षों में असम का सड़क नेटवर्क अमेरिका के सड़क नेटवर्क जैसा विश्वस्तरीय हो जाएगा।

  • कनेक्टिविटी: उन्होंने पिछले 10 वर्षों में पूर्वोत्तर में पूरी हुई मेगा सड़क परियोजनाओं और पुलों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भाजपा ने असम की तस्वीर बदल दी है।


3. चुनावी समीकरण: भ्रम दूर करने की कोशिश

गडकरी ने मतदाताओं को आगाह किया कि विपक्ष भाजपा को 'सांप्रदायिक' बताकर गुमराह कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा किसी जाति, धर्म या भाषा के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा और संसाधनों के सही वितरण के पक्ष में है।


असम चुनाव 2026: मुख्य तिथियां

कार्यक्रमतिथि
मतदान (Voting)9 अप्रैल 2026
मतगणना (Result)4 मई 2026

निष्कर्ष:

नितिन गडकरी का यह भाषण दो मोर्चों पर काम कर रहा है— पहला, CAA और घुसपैठ के मुद्दे पर पार्टी के वैचारिक आधार को मजबूत करना और दूसरा, विकास (सड़क और बुनियादी ढांचा) के अपने ट्रैक रिकॉर्ड के जरिए मध्यम वर्ग और युवाओं को आकर्षित करना। असम की राजनीति में ये दोनों ही कारक जीत-हार का फैसला करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

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