शूलिनी विश्वविद्यालय मामला: एमबीए छात्र की आत्महत्या के बाद FIR दर्ज; उत्पीड़न के गंभीर आरोप
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शूलिनी विश्वविद्यालय मामला: एमबीए छात्र की आत्महत्या के बाद FIR दर्ज; उत्पीड़न के गंभीर आरोप

12, 2, 2026

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शिमला/सोलन (2 अप्रैल 2026): रोहरू के निवासी नितिन चौहान ने 28 मार्च को कथित तौर पर फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। इस घटना ने कैंपस प्लेसमेंट और निजी कंपनियों में होने वाले शोषण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण और मुख्य आरोप:

  • प्लेसमेंट और शोषण: नितिन को विश्वविद्यालय के 'कैंपस प्लेसमेंट' के जरिए नौकरी मिली थी। परिजनों और प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि नियोक्ता (Employer) द्वारा उसका मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा था।

  • वेतन और काम का दबाव: वादे के मुताबिक 50,000 रुपये वेतन के बजाय उसे केवल आधा वेतन दिया जा रहा था। साथ ही, उसे देर रात तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।

  • सुसाइड नोट: पुलिस को नितिन के कमरे से एक डायरी मिली है, जिसमें एक सुसाइड नोट है। इसमें उसने अपने जीवन से हताश होने और काम के दबाव का जिक्र किया है।

पुलिस की कार्रवाई:

  1. प्राथमिकी (FIR): सोलन के पुलिस अधीक्षक (SP) तिरुमलाराजू एसडी वर्मा ने पुष्टि की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

  2. जांच के दायरे में: पुलिस अब उस निजी कंपनी और विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट सेल की भूमिका की जांच कर रही है जिसने नितिन को नौकरी दिलवाई थी।

  3. साक्ष्य: पुलिस ने छात्र का मोबाइल फोन, डायरी और अन्य सामान कब्जे में ले लिया है ताकि फोरेंसिक जांच के जरिए उत्पीड़न के दावों की पुष्टि की जा सके।


छात्रों का आक्रोश:

नितिन की मौत के बाद शूलिनी विश्वविद्यालय के छात्रों ने परिसर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों की मांग है कि:

  • प्लेसमेंट के नाम पर छात्रों को "बंधुआ मजदूर" बनाने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।

  • विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करे और पीड़ित परिवार को मुआवजा दे।


निष्कर्ष:

यह मामला कॉर्पोरेट शोषण और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी के बीच की धुंधली रेखा को उजागर करता है। यदि विश्वविद्यालय प्लेसमेंट की जिम्मेदारी लेता है, तो उसे छात्र के कार्यस्थल की परिस्थितियों और वादे के मुताबिक सुविधाओं की निगरानी भी करनी चाहिए।

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