निषाद पार्टी का 'पश्चिमी विस्तार': 5 अप्रैल को नोएडा में एकता महासम्मेलन; विपक्ष पर बोला हमला
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निषाद पार्टी का 'पश्चिमी विस्तार': 5 अप्रैल को नोएडा में एकता महासम्मेलन; विपक्ष पर बोला हमला

12, 2, 2026

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नोएडा (2 अप्रैल 2026): निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने प्रेस वार्ता के दौरान इस सम्मेलन को पिछड़ों और अति-पिछड़ों के 'सम्मान और अधिकार' की लड़ाई बताया।

1. महासम्मेलन का स्वरूप और उद्देश्य:

  • जातीय समीकरण: यह सम्मेलन केवल निषाद समाज तक सीमित नहीं है। इसमें कश्यप, गुर्जर, निषाद, पिछड़ा और अति-पिछड़ा वर्गों को एक मंच पर लाने की योजना है।

  • क्षेत्रीय विस्तार: अब तक निषाद पार्टी की ताकत मुख्य रूप से गोरखपुर, प्रयागराज और संतकबीरनगर जैसे पूर्वांचल के जिलों तक सीमित रही है। नोएडा में इस स्तर का आयोजन पश्चिमी यूपी की सियासत में दखल देने की एक सोची-समझी रणनीति है।


2. विपक्ष पर तीखा प्रहार:

संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को पिछड़ों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया:

  • बसपा पर आरोप: "बसपा ने पिछड़ों की रोजी-रोटी छीन ली।"

  • सपा पर आरोप: "सपा ने हमारे बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीना।"

  • संदेश: उन्होंने दावा किया कि केवल भाजपा और निषाद पार्टी का गठबंधन ही इस वर्ग को हक दिला सकता है।


3. भाजपा के साथ 'अटूट' गठबंधन:

सम्मेलन के माध्यम से संजय निषाद ने भाजपा को भी अपनी सांगठनिक शक्ति का अहसास कराया है:

  • सहयोगी की भूमिका: उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी केवल यूपी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य राज्यों में भी भाजपा उम्मीदवारों के लिए जमीन तैयार कर रही है।

  • ताकत का प्रदर्शन: गोरखपुर और प्रयागराज की सफल रैलियों के बाद नोएडा का यह आयोजन भाजपा के साथ आगामी 'सीट शेयरिंग' या राजनीतिक सौदेबाजी में निषाद पार्टी का पलड़ा भारी कर सकता है।


निष्कर्ष:

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कश्यप और निषाद समाज की एक अच्छी आबादी है, जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाती है। इस महासम्मेलन के जरिए संजय निषाद यह संदेश देना चाहते हैं कि वे केवल मछुआरा समाज के नहीं, बल्कि व्यापक अति-पिछड़ा वर्ग के नेता बनकर उभर रहे हैं।

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