नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क: 48 घंटे से 'बार्किंग डियर' लापता; 4 टीमें तलाश में जुटीं
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नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क: 48 घंटे से 'बार्किंग डियर' लापता; 4 टीमें तलाश में जुटीं

12, 2, 2026

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जयपुर (2 अप्रैल 2026): नाहरगढ़ जैविक उद्यान में उस समय हड़कंप मच गया जब नियमित गणना के दौरान एक बार्किंग डियर (Barking Deer) अपने बाड़े से नदारद पाया गया। सहायक वन संरक्षक देवेंद्र सिंह राठौड़ ने पुष्टि की है कि विभाग इस मामले की सघन जांच कर रहा है।

खोज अभियान की मुख्य बातें:

  • विशेष टीमें: लापता हिरण को खोजने के लिए चार अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें उद्यान के भीतर के घने जंगलों, झाड़ियों और आसपास के अरावली क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

  • लापरवाही का संदेह: वन्यजीव का सुरक्षित बाड़े से अचानक गायब होना सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है। अधिकारियों के पास फिलहाल इस बात का कोई जवाब नहीं है कि वह बाड़े से बाहर कैसे निकला या उसे किसी शिकारी जानवर ने निशाना बनाया है।

  • चुनौतीपूर्ण इलाका: नाहरगढ़ का पथरीला और झाड़ियों वाला इलाका खोज अभियान को कठिन बना रहा है, विशेषकर बार्किंग डियर जैसे छोटे और फुर्तीले जानवर के लिए जो अक्सर घने कवर में छिप जाते हैं।


बार्किंग डियर (काकड़) के बारे में खास बातें:

यह हिरण अपनी विशिष्ट विशेषताओं के कारण अन्य प्रजातियों से अलग होता है:

  1. आवाज: खतरे का आभास होने पर यह कुत्ते की तरह भौंकने (Barking) जैसी आवाज निकालता है, इसीलिए इसे 'बार्किंग डियर' कहा जाता है।

  2. स्वभाव: यह अत्यंत शर्मीला और एकांतप्रिय (Solitary) जीव है, जो ज्यादातर सुबह या शाम के समय सक्रिय होता है।

  3. आकार: यह आकार में काफी छोटा होता है, जिससे इसे घनी झाड़ियों में ढूंढ पाना मुश्किल हो जाता है।


निष्कर्ष और सुरक्षा पर सवाल:

पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच लोकप्रिय नाहरगढ़ उद्यान में इस तरह की घटना पहले भी सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल उठा चुकी है। वन विभाग अब सीसीटीवी फुटेज खंगालने और बाड़ों की जाली की जांच करने में जुटा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह किसी बाहरी घुसपैठ या मानवीय लापरवाही का नतीजा तो नहीं है।

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