सुप्रीम कोर्ट अपडेट: मतदाता सूची से नाम हटने पर कांग्रेस नेता को मिली राहत; न्यायाधिकरण में अपील की अनुमति
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: मतदाता सूची से नाम हटने पर कांग्रेस नेता को मिली राहत; न्यायाधिकरण में अपील की अनुमति

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता मोताब शेख की अर्जी पर सुनवाई की।

1. मुख्य विवाद और याचिकाकर्ता की मांग:

  • नाम हटाना: कांग्रेस के स्थानीय नेता मोताब शेख का नाम "विसंगति सूची" में डाल दिया गया था, जिसके कारण वे मतदाता सूची से बाहर हो गए।

  • नामांकन की चुनौती: नाम हटने के कारण वे आगामी चुनाव में अपना नामांकन पत्र (Nomination Paper) दाखिल नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने कोर्ट से अपना नाम बहाल करने और चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी थी।

2. 'सत्यापित मतदाता' और पासपोर्ट का तर्क:

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की:

  • वैध पहचान: कोर्ट ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता के पास भारतीय पासपोर्ट है और वह पहले से ही एक "सत्यापित मतदाता" रहा है।

  • शीघ्र निपटारा: पीठ ने निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ताकि किसी नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित न हो।


3. अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) की भूमिका:

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बाद कोलकाता में विशेष न्यायाधिकरणों का गठन किया गया है:

  • नेतृत्व: इन न्यायाधिकरणों की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों द्वारा की जा रही है।

  • कार्य प्रारंभ: ये न्यायाधिकरण 2 अप्रैल (बृहस्पतिवार) से कार्य करने लगे हैं।

  • वैकल्पिक उपाय: शीर्ष अदालत ने मोताब शेख को सीधे हस्तक्षेप के बजाय इस न्यायाधिकरण के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराने को कहा है।


4. निर्वाचन आयोग (ECI) का आश्वासन:

आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि:

  • आयोग किसी भी वास्तविक शिकायत (Genuine Grievance) के समाधान में पूरी सहायता करेगा।

  • यदि न्यायाधिकरण याचिकाकर्ता के पक्ष में आदेश देता है, तो आयोग नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करेगा।


निष्कर्ष और चुनावी प्रभाव:

पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले यह फैसला बहुत महत्वपूर्ण है। यह आदेश उन राजनीतिक दलों के लिए एक कानूनी हथियार बन सकता है जो आरोप लगा रहे हैं कि 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) का उपयोग उनके समर्थकों के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है।

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