संसद अपडेट: दिल्ली में 71% भूजल का उपयोग घरेलू कार्यों में; अवैध बोरवेल पर 'भारी जुर्माना' और सीलिंग की तैयारी
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संसद अपडेट: दिल्ली में 71% भूजल का उपयोग घरेलू कार्यों में; अवैध बोरवेल पर 'भारी जुर्माना' और सीलिंग की तैयारी

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने सदन को सूचित किया कि दिल्ली और उसके पड़ोसी एनसीआर जिलों में भूजल की निकासी का एक बड़ा हिस्सा अब केवल खेती नहीं, बल्कि घरेलू जरूरतों (विशेषकर ऊंची इमारतों) के लिए हो रहा है।

1. दिल्ली-एनसीआर में घरेलू भूजल दोहन के आंकड़े:

शहर/जिलाघरेलू उपयोग के लिए भूजल दोहन (%)
दिल्ली (Delhi)71.88%
फरीदाबाद (Faridabad)18.60%
गाजियाबाद (Ghaziabad)15.62%
सोनीपत (Sonipat)13.24%
गुरुग्राम (Gurugram)11.81%
गौतम बुद्ध नगर (Noida)3.21%

ध्यान दें: दिल्ली में यह अत्यधिक उच्च प्रतिशत (71.88%) दर्शाता है कि राजधानी की विशाल जनसंख्या अपनी दैनिक जरूरतों के लिए बाहरी आपूर्ति के बजाय जमीन के पानी पर निर्भर है।


2. अवैध दोहन पर सख्त कार्रवाई (CGWA की चेतावनी):

केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) ने भूजल के अवैध दोहन को रोकने के लिए निम्नलिखित कड़े उपायों की घोषणा की है:

  • पर्यावरण क्षतिपूर्ति (EC): अवैध बोरवेल संचालकों पर भारी जुर्माना और 'एनवायरनमेंटल कंपेंसेशन' शुल्क लगाया जा रहा है।

  • बोरवेल सीलिंग: बिना अनुमति के चल रहे वाणिज्यिक और आवासीय बोरवेलों को तत्काल सील करने की प्रक्रिया जारी है।

  • निगरानी: ऊंची इमारतों और अपार्टमेंट्स में पानी के मीटर और रिचार्ज पिट्स की अनिवार्य जांच की जाएगी।


3. बाढ़ प्रबंधन और भूजल सुधार (सकारात्मक आंकड़े):

जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल और राज्य मंत्री ने देशव्यापी राहत के कुछ आंकड़े भी साझा किए:

  • बाढ़ से सुरक्षा: 'बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम' (FMBAP) के तहत 431 परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिससे लगभग 51.3 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षा मिली है।

  • भूजल स्तर में सुधार: एक उत्साहजनक आंकड़े के अनुसार, देशभर में निगरानी किए गए 73% कुओं के जल स्तर में बढ़ोतरी देखी गई है। यह सुधार पिछले दशक (2015-2024) के औसत की तुलना में 2025 के मानसून के बाद दर्ज किया गया है।


निष्कर्ष:

जहाँ एक ओर देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर में सुधार हो रहा है, वहीं दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरी केंद्रों में 'घरेलू मांग' पानी के स्टॉक को तेजी से खत्म कर रही है। सरकार अब ऊँची इमारतों में वॉटर रिसाइकलिंग और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को कड़ाई से लागू करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

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