टिहरी भालू आतंक: वन दरोगा समेत 3 घायल; भारी हंगामे के बाद भालू को मारने का आदेश जारी
आज की ताजा खबर
LIVE

टिहरी भालू आतंक: वन दरोगा समेत 3 घायल; भारी हंगामे के बाद भालू को मारने का आदेश जारी

12, 2, 2026

11

image

नई टिहरी (2 अप्रैल 2026): चंबा-धरासू राजमार्ग पर स्थित सुल्याधार क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सक्रिय भालू ने बृहस्पतिवार को वन विभाग की गश्ती टीम और ग्रामीणों पर जानलेवा हमला कर दिया।

1. हमले का घटनाक्रम और बहादुरी की कहानी:

  • अचानक हमला: ग्रामीण जब वन विभाग की टीम को भालू की मौजूदगी वाला इलाका दिखाने ले गए, तो झाड़ियों में छिपे भालू ने उन पर हमला बोल दिया।

  • घायल: इस हमले में वन दरोगा अजयपाल पंवार, बेरगणी के ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह रावत और ग्रामीण विनोद रावत गंभीर रूप से घायल हो गए।

  • जवाबी संघर्ष: तीनों ने निहत्थे होने के बावजूद भालू का डटकर मुकाबला किया और उसे भागने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, संघर्ष में विनोद रावत के चेहरे पर गहरे जख्म आए हैं।


2. डीएफओ (DFO) के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा:

घटना के बाद घायलों को अस्पताल ले जाने के बजाय ग्रामीण एम्बुलेंस से सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुँच गए। ग्रामीणों के गुस्से के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  • सबूत की मांग: आरोप है कि घटना की सूचना देने पर डीएफओ पुनीत तोमर ने भालू के हमले के 'सबूत' मांगे, जिससे लोग भड़क गए।

  • सुरक्षा में चूक: ग्रामीणों का कहना है कि गश्ती दल को केवल लाठी-डंडों के भरोसे भेजा गया था, जबकि भालू के खूंखार होने की जानकारी पहले से थी। यदि टीम के पास हथियार होते, तो यह नौबत नहीं आती।

  • नारेबाजी: पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनाई और अन्य प्रदर्शनकारियों ने डीएफओ को हटाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।


3. प्रशासनिक कार्रवाई और समझौता:

बढ़ते तनाव को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) वरूणा अग्रवाल और अन्य अधिकारियों ने मोर्चा संभाला:

  • माफी: डीएफओ पुनीत तोमर ने कलेक्ट्रेट पहुँचकर ग्रामीणों से अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी।

  • मारने का आदेश: सीडीओ ने पुष्टि की कि उच्च स्तर से भालू को ढेर करने (Eliminate) के आदेश मिल चुके हैं। प्रभावित क्षेत्र में जल्द ही शार्प शूटर्स तैनात किए जाएंगे।

  • जांच समिति: एसडीएम कमलेश मेहता की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है जो पूरे मामले और विभागीय लापरवाही की जांच करेगी।


4. राजनीतिक दबाव:

प्रतापनगर से कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नेगी ने देहरादून में प्रमुख वन संरक्षक को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि भालू को तुरंत नहीं मारा गया, तो वे ग्रामीणों के साथ बड़ा आंदोलन करेंगे।


निष्कर्ष:

पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) एक गंभीर समस्या बनी हुई है। टिहरी की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि फील्ड स्टाफ को बिना उचित सुरक्षा उपकरणों (जैसे ट्रैकर्स या ट्रanquilizer guns) के भेजना न केवल कर्मचारियों बल्कि ग्रामीणों के लिए भी जानलेवा हो सकता है। फिलहाल, सभी घायलों की स्थिति खतरे से बाहर है और जिला अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है।

Powered by Froala Editor