चंडीगढ़ ब्लास्ट: भगवंत मान का पलटवार; "भाजपा बेतुके बयान देना बंद करे, चंडीगढ़ UT प्रशासन के अधीन है"
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चंडीगढ़ ब्लास्ट: भगवंत मान का पलटवार; "भाजपा बेतुके बयान देना बंद करे, चंडीगढ़ UT प्रशासन के अधीन है"

12, 2, 2026

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संगरूर/चंडीगढ़ (2 अप्रैल 2026): बुधवार शाम करीब 5:00 बजे चंडीगढ़ स्थित पंजाब भाजपा कार्यालय के पास एक संदिग्ध विस्फोटक उपकरण फेंके जाने से धमाका हुआ था। हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इसने पंजाब और चंडीगढ़ के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

1. मुख्यमंत्री भगवंत मान की मुख्य दलीलें:

  • अधिकार क्षेत्र का मुद्दा: मान ने याद दिलाया कि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश (UT) है और वहां के प्रशासक पंजाब के राज्यपाल हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा की सीधी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और उसके प्रतिनिधि की होती है।

  • भाजपा पर निशाना: मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा हर छोटी-बड़ी घटना के लिए (चाहे वह किसानों का आंदोलन हो या पीयू की हिंसा) बिना सोचे-समझे पंजाब सरकार को दोषी ठहराने लगती है।

  • बेतुकी बयानबाजी: उन्होंने भाजपा नेताओं को "बेतुके" और आधारहीन बयानों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि वे अपनी ही केंद्र सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाने के बजाय पंजाब को निशाना बना रहे हैं।


2. घटना का विवरण: भाजपा कार्यालय के पास विस्फोट

  • समय: बुधवार, 1 अप्रैल 2026, शाम लगभग 5:00 बजे।

  • स्थान: सेक्टर 37, चंडीगढ़ (पंजाब भाजपा मुख्यालय के समीप)।

  • नुकसान: गनीमत रही कि विस्फोट में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इसे एक बड़ी चूक माना है।

  • जांच: चंडीगढ़ पुलिस और फॉरेंसिक टीमें मामले की जांच कर रही हैं। फिलहाल किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।


3. राजनीतिक टकराव (पंजाब vs केंद्र):

पक्षतर्क / आरोप
भाजपा (Punjab BJP)आरोप लगाया कि पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का असर अब चंडीगढ़ तक पहुँच रहा है और राज्य सरकार विफल है।
आम आदमी पार्टी (AAP)तर्क दिया कि भाजपा अपनी सुरक्षा विफलताओं को छिपाने के लिए 'शिफ्टिंग ऑफ ब्लेम' (दोषारोपण) का सहारा ले रही है।

निष्कर्ष:

यह विवाद एक बार फिर चंडीगढ़ पर अधिकार और उसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पंजाब और केंद्र के बीच पुराने गतिरोध को उजागर करता है। भगवंत मान का यह बयान सुरक्षा के तकनीकी और संवैधानिक पहलुओं पर आधारित है, जो भाजपा को सीधे तौर पर केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन की जिम्मेदारी याद दिलाता है।

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