कोलकाता चुनाव कार्यालय हंगामा: TMC के 2 पार्षदों समेत कई पर FIR; CEO बोले— "गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं"
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कोलकाता चुनाव कार्यालय हंगामा: TMC के 2 पार्षदों समेत कई पर FIR; CEO बोले— "गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं"

12, 2, 2026

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कोलकाता (2 अप्रैल 2026): स्ट्रैंड रोड स्थित चुनाव आयोग के क्षेत्रीय मुख्यालय के बाहर मंगलवार रात हुई घटना को आयोग ने "चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास" माना है।

1. किनके खिलाफ हुई कार्रवाई?

पुलिस ने निषेधाज्ञा (Section 144/निषेध के आदेश) का उल्लंघन करने और पुलिस के निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप में मामला दर्ज किया है:

  • सचिन सिंह: पार्षद, वार्ड 36 (बेलेघाटा क्षेत्र)।

  • शांति रंजन कुंडू: पार्षद, वार्ड 32।

  • अन्य: इनके अलावा 4 अन्य प्रमुख व्यक्तियों और कई अज्ञात 'असामाजिक तत्वों' को नामजद किया गया है।


2. घटना का कारण: फॉर्म-6 और मतदाता सूची विवाद

  • विरोध का केंद्र: टीएमसी समर्थित बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLO) और पार्षदों का आरोप था कि फॉर्म-6 (नया नाम जोड़ने हेतु आवेदन) की प्रक्रिया में हेरफेर किया जा रहा है।

  • झड़प: मंगलवार सुबह से शुरू हुआ यह प्रदर्शन रात तक चला, जिसमें प्रदर्शनकारियों की पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ तीखी झड़प हुई।

  • निषेधाज्ञा का उल्लंघन: बिना अनुमति के भारी संख्या में भीड़ जुटाकर आयोग के कार्यालय का घेराव किया गया और आधी रात तक नारेबाजी की गई।


3. चुनाव आयोग (CEO) का कड़ा प्रहार:

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया (X) पर साझा करते हुए बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया:

  • "असामाजिक गतिविधि": आयोग ने पार्षद के नेतृत्व में जमा भीड़ को "गुंडों का समूह" बताया।

  • स्पष्ट संदेश: आयोग ने साफ कर दिया कि संवैधानिक संस्था के काम में बाधा डालने और अधिकारियों को डराने के किसी भी प्रयास को "कतई बर्दाश्त" (Zero Tolerance) नहीं किया जाएगा।


4. राजनीतिक संदर्भ (Bengal Polls 2026):

पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले 'मतदाता सूची' (Voter List) सबसे बड़ा विवाद का विषय बन गई है। एक ओर जहां टीएमसी 'हेरफेर' का आरोप लगा रही है, वहीं चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी राजनीतिक दबाव में आए बिना 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया को पूरा करेगा।


निष्कर्ष:

पार्षदों के खिलाफ FIR दर्ज होना यह दर्शाता है कि इस बार चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और अपनी स्वायत्तता को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य प्रदर्शनकारियों की पहचान कर रही है।

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