असम चुनाव 2026: NGT ने 1,600 वन रक्षकों की चुनावी ड्यूटी पर लगाई रोक; कहा— "वन सुरक्षा सर्वोपरि"
आज की ताजा खबर
LIVE

असम चुनाव 2026: NGT ने 1,600 वन रक्षकों की चुनावी ड्यूटी पर लगाई रोक; कहा— "वन सुरक्षा सर्वोपरि"

12, 2, 2026

1

image

नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): कोलकाता स्थित एनजीटी की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ (न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह) ने असम सरकार के 19 मार्च के उस आदेश को स्थगित कर दिया है, जिसमें 1,600 वन सुरक्षा कर्मियों को पुलिस की सहायता के लिए तैनात किया गया था।

1. याचिका के मुख्य तर्क (वकील गौरव बंसल द्वारा दायर):

  • कर्तव्य से विमुख: याचिका में तर्क दिया गया कि वन रक्षकों का प्राथमिक कार्य जैविक विविधता अधिनियम के तहत वनों और वन्यजीवों की रक्षा करना है। उन्हें चुनाव जैसे गैर-वानिकी कार्यों में लगाना उनके वैधानिक दायित्वों का उल्लंघन है।

  • सुरक्षा में सेंध: इतनी बड़ी संख्या (1,600) में अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को हटाने से असम के संवेदनशील वनों में अवैध शिकार (Poaching), लकड़ी की तस्करी और वन्यजीवों के अवैध व्यापार का खतरा बढ़ जाएगा।

  • पारिस्थितिक जोखिम: काजीरंगा और मानस जैसे राष्ट्रीय उद्यानों वाले राज्य में वन रक्षकों की अनुपस्थिति 'पारिस्थितिक आपदा' को निमंत्रण दे सकती है।


2. एनजीटी (NGT) का कड़ा रुख और निर्देश:

  • महत्वपूर्ण प्रश्न: अधिकरण ने माना कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण से संबंधित एक "महत्वपूर्ण प्रश्न" खड़ा करता है।

  • नोटिस जारी: एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, असम सरकार, राज्य जैव विविधता बोर्ड और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

  • अंतरिम रोक: सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार के 19 मार्च के आदेश पर तत्काल रोक लगा दी गई है।


3. चुनावी प्रबंधन पर प्रभाव:

पहलूप्रभाव
सुरक्षा बल की कमीचुनाव आयोग और राज्य सरकार को अब 1,600 जवानों की कमी को पूरा करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) या अन्य राज्यों की पुलिस पर निर्भर रहना होगा।
अगली सुनवाई6 अप्रैल 2026 को मामले की अगली सुनवाई होगी, जहाँ सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।
नया उदाहरणयह आदेश भविष्य के चुनावों के लिए एक मिसाल बनेगा कि 'पर्यावरण सुरक्षा' को प्रशासनिक कार्यों के लिए हल्के में नहीं लिया जा सकता।

निष्कर्ष:

असम में चुनाव के लिए केवल एक सप्ताह का समय बचा है (9 अप्रैल मतदान)। ऐसे में एनजीटी का यह फैसला राज्य के गृह विभाग और चुनाव सेल के लिए सुरक्षा योजना को फिर से तैयार करने की चुनौती पेश करेगा। विशेष रूप से संवेदनशील और सुदूरवर्ती इलाकों में मतदान केंद्रों की सुरक्षा के लिए अब वैकल्पिक बलों की तैनाती अनिवार्य हो गई है।

Powered by Froala Editor