नगालैंड कांग्रेस में संकट: के. थेरी का इस्तीफा; AICC पर 'विश्वासघात' और 'हस्तक्षेप' का आरोप
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नगालैंड कांग्रेस में संकट: के. थेरी का इस्तीफा; AICC पर 'विश्वासघात' और 'हस्तक्षेप' का आरोप

12, 2, 2026

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कोहिमा (2 अप्रैल 2026): पूर्व मंत्री के. थेरी ने अपना त्यागपत्र प्रदेश प्रभारी सप्तगिरि शंकर उलका के माध्यम से कांग्रेस अध्यक्ष को भेज दिया है। उनके आरोपों ने पार्टी के आंतरिक अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

1. इस्तीफे के 3 प्रमुख कारण (Key Allegations):

  • 10-सूत्री समझौते का उल्लंघन: थेरी का कहना है कि AICC और NPCC के बीच एक लिखित समझौता हुआ था, जो नगालैंड की विशिष्ट स्थिति (अनुच्छेद 371A) के तहत राज्य इकाई को स्वायत्तता (Autonomy) प्रदान करता था। थेरी के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व इस समझौते से पीछे हट गया है।

  • अधिकारों का हनन: उन्होंने दावा किया कि 'संगठन सृजन अभियान' के नाम पर दिल्ली से सीधा हस्तक्षेप किया जा रहा है, जिससे प्रदेश इकाई के अधिकार कमजोर हो रहे हैं। उनका मानना है कि राज्य इकाई को "मुद्दों पर क्षेत्रीय और दृष्टिकोण पर राष्ट्रीय" होना चाहिए।

  • चुनाव निधि के गबन का आरोप: थेरी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगालैंड के प्रभारी AICC पदाधिकारियों ने चुनाव फंड में हेराफेरी की है। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को पार्टी द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि विरोध करने वालों को किनारे लगाया जा रहा है।


2. प्रदेश इकाई की प्रतिक्रिया:

  • एस. सुपोंगमेरेन जामिर (NPCC अध्यक्ष): वर्तमान अध्यक्ष और सांसद जामिर ने कहा कि उन्हें आधिकारिक तौर पर अभी तक थेरी का इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है।

  • AICC का रुख: केंद्रीय नेतृत्व ने अभी तक इन गंभीर आरोपों और इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।


3. राजनीतिक विश्लेषण (Context):

पहलूप्रभाव
अनुच्छेद 371Aनगालैंड को विशेष दर्जा देता है। थेरी का तर्क है कि पार्टी का ढांचा भी इसी सांस्कृतिक और राजनीतिक संवेदनशीलता के अनुरूप होना चाहिए।
क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीययह विवाद दर्शाता है कि पूर्वोत्तर राज्यों में क्षेत्रीय स्वायत्तता और केंद्रीय कमान के बीच संतुलन बनाना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पार्टी की स्थितिके. थेरी जैसे अनुभवी नेता का जाना नगालैंड में कांग्रेस के आधार को और कमजोर कर सकता है, जहाँ पार्टी पहले से ही सत्ता से बाहर संघर्ष कर रही है।

निष्कर्ष:

के. थेरी का इस्तीफा न केवल नगालैंड कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी को उजागर करता है, बल्कि यह केंद्रीय नेतृत्व (High Command) की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाता है। चुनाव फंड में गबन के आरोपों की यदि स्वतंत्र जांच नहीं हुई, तो यह आने वाले समय में पार्टी की छवि को और नुकसान पहुँचा सकता है।

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