गांदरबल मुठभेड़ विवाद: उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने उठाए सवाल; SSP समेत 82 अधिकारियों का तबादला
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गांदरबल मुठभेड़ विवाद: उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने उठाए सवाल; SSP समेत 82 अधिकारियों का तबादला

12, 2, 2026

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श्रीनगर (2 अप्रैल 2026): अरहामा गांव में रात भर चले अभियान के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब 'पारदर्शी जांच' की मांग में बदल गया है।

1. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का रुख:

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया (X) के जरिए सेना के दावों पर संदेह जताते हुए स्पष्ट कहा:

  • पारदर्शी जांच: परिवार के आरोपों को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। तथ्यों को सार्वजनिक करने के लिए समयबद्ध और निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।

  • विश्वसनीयता का संकट: जांच की घोषणा में देरी से सुरक्षा बलों और प्रशासन की साख को नुकसान पहुँचेगा।


2. महबूबा मुफ्ती और रुहुल्लाह मेहदी के आरोप:

  • बयानों में विसंगति: महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि सेना ने पहले उसे 'विदेशी' और फिर 'स्थानीय' आतंकवादी बताया। उन्होंने दावा किया कि राशिद एक अनाथ था जो सामाजिक सेवा (NGO) से जुड़ा था।

  • अंतिम संस्कार पर विवाद: महबूबा ने नाराजगी जताई कि राशिद का शव परिजनों को न सौंपकर बारामूला में दफना दिया गया।

  • सांसद आगा सैयद: श्रीनगर सांसद ने आरोप लगाया कि राशिद के कपड़े बदले गए थे और वह एक निर्दोष नागरिक था जो बैंक ऋण के फॉर्म भरने में लोगों की मदद करता था।


3. गांदरबल पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल:

विवाद के बीच उपराज्यपाल (LG) प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर पुलिस विभाग में एक व्यापक फेरबदल किया है:

  • SSP का तबादला: गांदरबल के एसएसपी खलील अहमद पोसवाल का तबादला 12वीं इंडिया रिजर्व बटालियन में कर दिया गया है।

  • नए एसएसपी: 2016 बैच के IPS अधिकारी सुधांशु धामा को गांदरबल का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।

  • व्यापक स्तर पर कार्रवाई: कुल 82 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, जिसे इस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।


4. घटनाक्रम का सारांश:

पक्षमुख्य तर्क / कार्रवाई
सेना/सुरक्षा बलअरहामा गांव में मुठभेड़ के दौरान एक आतंकवादी को मार गिराया।
परिजनों का दावाराशिद बेगुनाह था, वह लोगों की सरकारी योजनाओं में मदद करता था।
विपक्ष (PDP/NC)इसे 'फर्जी मुठभेड़' का संदेह बताते हुए शव सौंपने की मांग की।
प्रशासनकानून-व्यवस्था और जांच के मद्देनजर एसएसपी समेत भारी तबादले।

निष्कर्ष:

गांदरबल की इस घटना ने कश्मीर में नागरिक सुरक्षा और सुरक्षा बलों के ऑपरेशन्स के बीच के संवेदनशील संतुलन को फिर से चर्चा में ला दिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की 'पारदर्शी जांच' की मांग केंद्र और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। नए एसएसपी सुधांशु धामा के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता इलाके में विश्वास बहाली और इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना होगी।

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