छठा जनरल के. सुंदरजी स्मृति व्याख्यान: "विभाजित दुनिया में रणनीतिक स्वायत्तता"
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छठा जनरल के. सुंदरजी स्मृति व्याख्यान: "विभाजित दुनिया में रणनीतिक स्वायत्तता"

12, 2, 2026

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जयपुर (2 अप्रैल 2026): ‘मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल’ और ‘सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज’ (CLAWS) के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी में देश के शीर्ष सैन्य और सुरक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया।

1. रणनीतिक स्वायत्तता क्यों जरूरी है? (मुख्य बिंदु):

लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंह ने उन वैश्विक कारकों को रेखांकित किया जो भारत की सुरक्षा नीति को प्रभावित कर रहे हैं:

  • महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा: अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के बीच बढ़ता तनाव।

  • भू-आर्थिक विखंडन: वैश्विक अर्थव्यवस्था का गुटों में बँटना और सप्लाई चेन की बाधाएं।

  • तकनीकी मुकाबला: एआई (AI), साइबर और अंतरिक्ष जैसी उभरती तकनीकों में बढ़ती रेस।

  • क्षेत्रीय संघर्ष: पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में जारी युद्धों का प्रभाव।

"रणनीतिक स्वायत्तता अब केवल एक कूटनीतिक आकांक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रों के लिए अपनी संप्रभुता, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा की रक्षा हेतु अनिवार्य है।" — लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंह


2. संगोष्ठी की मुख्य चर्चाएं (Key Themes):

रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, कार्यक्रम में निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया:

  • विदेश नीति का पुनर्संतुलन: एक बहुध्रुवीय (Multipolar) विश्व में भारत के हितों को सुरक्षित रखना।

  • स्वदेशीकरण और संयुक्तता: रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल (Jointness) को मजबूत करना।

  • हिंद-प्रशांत सुरक्षा: समुद्री सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण के बीच संतुलन बनाना।

  • राष्ट्रीय लचीलापन (National Resilience): आर्थिक दबाव और सुरक्षा चुनौतियों के बीच राष्ट्र की अडिग रहने की क्षमता।


3. प्रमुख वक्ताओं की भागीदारी:

वक्तापद / पहचान
पंकज सरनपूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA)
वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंहमहानिदेशक, ‘यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया’
लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंहकमांडर-इन-चीफ, दक्षिण-पश्चिमी कमान

निष्कर्ष:

जनरल के. सुंदरजी, जिन्हें भारतीय सेना के 'आधुनिकीकरण का जनक' माना जाता है, उनकी स्मृति में आयोजित यह व्याख्यान भारत की भावी सैन्य रणनीति को दिशा देने वाला रहा। विशेषज्ञों का एकमत था कि भारत को किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपनी 'स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता' को बनाए रखना चाहिए, जो कि मजबूत अर्थव्यवस्था और स्वदेशी रक्षा उत्पादन (Defense Indigenization) पर टिकी हो।

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