राज्यसभा में अमरावती विधेयक पर रार: 'धोखे' के आरोपों पर किरेन रीजीजू का पलटवार
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राज्यसभा में अमरावती विधेयक पर रार: 'धोखे' के आरोपों पर किरेन रीजीजू का पलटवार

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): सदन में चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने नीतीश कुमार और शिवसेना के उदाहरणों का हवाला देते हुए चंद्रबाबू नायडू की पार्टी को सतर्क रहने की सलाह दी।

1. विपक्ष का 'चेतावनी' कार्ड (TDP को सलाह):

  • TMC (नदीमुल हक): उन्होंने टीडीपी को बिहार (नीतीश कुमार) और महाराष्ट्र (उद्धव बनाम शिंदे) के घटनाक्रमों से सबक लेने को कहा। हक ने आरोप लगाया कि भाजपा सहयोगियों का इस्तेमाल कर उन्हें छोड़ देती है।

  • AAP (संजय सिंह): आप सांसद ने टीडीपी को व्यावहारिक सलाह देते हुए कहा— "जब तक आप सत्ता में हैं और आपके पास ताकत है, अमरावती के विकास के लिए केंद्र से सारा फंड निकाल लीजिए, क्योंकि भाजपा का इतिहास सहयोगियों को धोखा देने का रहा है।" उन्होंने मोरारजी देसाई सरकार का भी उदाहरण दिया।

  • RJD (मनोज झा): उन्होंने नीतीश कुमार के इस्तीफे और उनके राज्यसभा आने की चर्चाओं पर चुटकी लेते हुए कहा कि एक मुख्यमंत्री को सदन में (राज्यसभा) लाया जा रहा है।


2. सरकार का बचाव: "हमें वफादारी न सिखाएं"

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कड़ा रुख अपनाया:

  • दोस्ती का सम्मान: रीजीजू ने स्पष्ट कहा, "हम मित्रता का सम्मान करते हैं। हम धोखा नहीं देते।" * ममता बनर्जी का उदाहरण: उन्होंने टीएमसी को याद दिलाया कि जब ममता बनर्जी लोकसभा में अपनी पार्टी की इकलौती सांसद थीं और वामपंथियों ने उन पर हमला किया था, तब भाजपा सदस्यों ने ही उनकी रक्षा की थी।

  • वफादारी का पाठ: उन्होंने विपक्ष से कहा कि उन्हें वफादारी और दोस्ती का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है।


3. विधेयक का मुख्य एजेंडा: अमरावती की बहाली

राजनीतिक बयानबाजी के बीच विधेयक के तकनीकी पक्ष महत्वपूर्ण हैं:

  • राजधानी का दर्जा: इस संशोधन के जरिए 2 जून 2024 की पिछली तारीख (Retrospective effect) से अमरावती को आधिकारिक राजधानी घोषित करने का प्रावधान है।

  • विकास कोष: विधेयक में राजधानी के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए विशेष केंद्रीय सहायता का भी खाका तैयार किया गया है।


निष्कर्ष:

अमरावती को लेकर लाया गया यह विधेयक आंध्र प्रदेश के लिए एक भावनात्मक और विकासपरक मुद्दा है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति के चश्मे से इसे भाजपा और टीडीपी के बीच के 'पावर गेम' के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष की कोशिश टीडीपी के मन में असुरक्षा पैदा करने की थी, जबकि भाजपा ने इसे अपनी 'विश्वसनीयता' साबित करने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया।

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