बंगाल चुनाव 2026: 'SIR' के विरोध में सुलग रहा बंगाल; राजमार्ग जाम और टायर जलाकर प्रदर्शन
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बंगाल चुनाव 2026: 'SIR' के विरोध में सुलग रहा बंगाल; राजमार्ग जाम और टायर जलाकर प्रदर्शन

12, 2, 2026

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कोलकाता/मालदा (2 अप्रैल 2026): मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के आरोपों के बीच प्रदर्शनकारियों ने उत्तर और दक्षिण बंगाल को जोड़ने वाली प्रमुख जीवनरेखाओं को बाधित कर दिया है।

1. जिलावार प्रदर्शनों की स्थिति:

जिलास्थानघटनाक्रम
मालदाकालियाचक, मंगलबाड़ी, जादुपुरराष्ट्रीय राजमार्ग-12 को 4 घंटे तक जाम किया गया। टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन। ADM के आश्वासन के बाद जाम खुला।
जलपाईगुड़ीमैनागुड़ी (हुसुलडांगा)राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर चक्का जाम। पात्र मतदाताओं ने नाम हटाए जाने पर नाराजगी जताई।
कूच बिहारमदरसा मोड़कूच बिहार-मथाभंगा मुख्य सड़क 3 घंटे तक अवरुद्ध रही।
पूर्वी बर्द्धमानशक्तिगढ़'मौन मार्च' (Silent March) निकालकर शांतिपूर्ण लेकिन कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

2. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें:

  • दस्तावेजों की वैधता: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके पास आधार, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे सभी वैध दस्तावेज होने के बावजूद 'SIR' प्रक्रिया के दौरान उनके नाम हटा दिए गए हैं।

  • तत्काल सुधार: लोग मांग कर रहे हैं कि 23 अप्रैल के मतदान से पहले मतदाता सूची को फिर से दुरुस्त किया जाए ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।


3. राजनीतिक उबाल: ममता बनर्जी का 'साजिश' का आरोप

इन प्रदर्शनों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर सीधा हमला बोला है:

  • राष्ट्रपति शासन का डर: ममता ने आरोप लगाया कि अमित शाह जानबूझकर राज्य में अशांति फैला रहे हैं ताकि चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन (President's Rule) लगाने का बहाना मिल सके।

  • अमित शाह को चुनौती: उन्होंने इसे 'दिल्ली की साजिश' करार देते हुए कहा कि बंगाल के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना जा रहा है।


4. न्यायिक अधिकारियों का घेराव (मालदा घटना):

बुधवार रात मालदा के कालियाचक में जो घटना हुई, उसने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। 7 न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने बंधक बना लिया था, जिन्हें सुरक्षा बलों ने कड़ी मशक्कत के बाद मुक्त कराया। इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा और कड़ी कर दी है।


निष्कर्ष:

'SIR' (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया अब केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा 'चुनावी मुद्दा' बन गई है। जहाँ विपक्ष इसे धांधली रोकने का तरीका बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष और प्रदर्शनकारी इसे लाखों लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश मान रहे हैं। यदि समय रहते शिकायतों का निस्तारण नहीं हुआ, तो मतदान के दिन गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है।

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