संसद विशेष सत्र: महिला आरक्षण और सीटों के विस्तार का मेगा प्लान
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संसद विशेष सत्र: महिला आरक्षण और सीटों के विस्तार का मेगा प्लान

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने घोषणा की है कि सरकार एक "अत्यंत महत्वपूर्ण" विधेयक लाने जा रही है, जो देश की लोकतांत्रिक संरचना को बदल देगा।

1. प्रस्तावित विधेयक के मुख्य बिंदु:

सरकार जिस मसौदे पर विचार कर रही है, उसके अनुसार बड़े बदलाव संभव हैं:

  • सीटों में वृद्धि: लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है।

  • आरक्षित सीटें: बढ़ी हुई सीटों में से 273 सीटें (33%) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

  • परिसीमन से पृथक: सरकार महिलाओं के आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की लंबी प्रक्रिया से अलग कर सीधे लागू करने के लिए संविधान संशोधन ला सकती है।


2. सदन में तीखी नोकझोंक: सत्तापक्ष बनाम विपक्ष

नेतामुख्य तर्क / आरोप
किरेन रीजीजू"हम महिलाओं से किया वादा पूरा करने को बाध्य हैं। इसका चुनावों से संबंध नहीं, यह एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।"
मल्लिकार्जुन खरगे"हम आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार चुनाव के समय यह विधेयक लाकर राजनीतिक लाभ के लिए 'खेल' खेल रही है।"
जयराम रमेश"आचार संहिता लागू है, फिर भी सरकार चुनावी लाभ के लिए बैठक बुला रही है। यह 29 अप्रैल के बाद होनी चाहिए।"
जे.पी. नड्डा"विधेयक कब पेश करना है, यह सरकार का विशेषाधिकार है। विपक्ष चर्चा से क्यों भाग रहा है?"

3. कार्यवाही का नया कार्यक्रम:

  • स्थगन: दोनों सदन आज (2 अप्रैल) स्थगित कर दिए गए हैं।

  • पुन: बैठक: अब अगली बैठक 16 अप्रैल सुबह 11 बजे होगी।

  • विशेष नियम: 16 अप्रैल की बैठक में प्रश्नकाल, शून्यकाल या कोई गैर-सरकारी कामकाज नहीं होगा; केवल विधायी कार्यों पर ध्यान दिया जाएगा।


4. 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का सफर:

  • सितंबर 2023: संसद ने 33% महिला आरक्षण विधेयक पारित किया था।

  • चुनौती: मूल कानून के अनुसार, इसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू किया जा सकता था।

  • 2026 का संशोधन: सरकार अब इसी तकनीकी बाधा को हटाने के लिए संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है ताकि आगामी चुनावों में महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।


निष्कर्ष:

लोकसभा की सीटों को 816 तक ले जाना स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा चुनावी सुधार होगा। जहाँ सरकार इसे 'महिला सशक्तिकरण' की दिशा में मील का पत्थर बता रही है, वहीं विपक्ष इसे पांच राज्यों (जैसे पश्चिम बंगाल, असम आदि) में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच 'मास्टरस्ट्रोक' मान रहा है। 16 अप्रैल से शुरू होने वाली यह तीन दिवसीय बैठक भारतीय राजनीति की नई दिशा तय करेगी।

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