दिल्ली हाई कोर्ट का हंटर: हनी सिंह और बादशाह के 'अश्लील' गीत को हटाने का आदेश
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दिल्ली हाई कोर्ट का हंटर: हनी सिंह और बादशाह के 'अश्लील' गीत को हटाने का आदेश

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): 'हिंदू शक्ति दल' द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कलात्मक स्वतंत्रता (Artistic Freedom) की सीमाओं को स्पष्ट किया।

1. अदालत की सख्त टिप्पणियाँ:

  • अंतरात्मा झकझोर दी: न्यायमूर्ति कौरव ने कहा कि उन्होंने अपने चैंबर में वह गीत सुना और वह इतना आपत्तिजनक है कि उसने "अदालत की अंतरात्मा को पूरी तरह झकझोर" दिया है।

  • शीर्षक पर रोक: गीत की अश्लीलता का स्तर इतना अधिक था कि जज ने आदेश में उस गीत का शीर्षक (Title) तक दर्ज करने से इनकार कर दिया।

  • शून्य सामाजिक मूल्य: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस गीत में कोई कलात्मक या सामाजिक मूल्य नहीं है; यह केवल महिलाओं को उपहास का पात्र बनाता है और अभद्रता फैलाता है।


2. अभिव्यक्ति की आजादी बनाम नैतिकता:

न्यायालय ने 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' (Freedom of Speech) के तर्क को खारिज करते हुए महत्वपूर्ण बात कही:

  • नाबालिगों पर प्रभाव: ऐसे गीत सोशल मीडिया पर मौजूद हैं जहाँ नाबालिगों (Minors) की आसान पहुँच है। कानून के शासन वाले समाज में इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

  • न्यूनतम मानक: यह गीत शिष्टता और नैतिकता के न्यूनतम मानकों की भी पूरी तरह अवहेलना करता है।


3. कानूनी कार्रवाई और निर्देश:

  • नोटिस जारी: अदालत ने हनी सिंह और बादशाह को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

  • डिजिटल क्लीनअप: सभी ऑनलाइन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया गया है कि इस गीत के सभी वर्जन तुरंत हटाए जाएं।

  • अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 7 मई 2026 को तय की गई है।


4. मामले की पृष्ठभूमि:

यह विवाद उस समय का है जब हनी सिंह और बादशाह 'माफिया मुंडीर' समूह का हिस्सा थे। हालांकि दोनों कलाकार अब अलग हो चुके हैं और कई बार इस तरह के पुराने विवादित गीतों से खुद को अलग बता चुके हैं, लेकिन इंटरनेट पर मौजूद इन गानों की लोकप्रियता और उनके कंटेंट ने उन्हें फिर से कानूनी कानूनी घेरे में ला खड़ा किया है।


निष्कर्ष:

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला मनोरंजन उद्योग के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यह स्पष्ट करता है कि रचनात्मकता के नाम पर अश्लीलता को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब वह समाज के नैतिक ताने-बाने और महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाती हो।

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