सिद्धरमैया का दावणगेरे में संबोधन: "भाजपा अमीरों के साथ, कांग्रेस गरीबों के साथ"
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सिद्धरमैया का दावणगेरे में संबोधन: "भाजपा अमीरों के साथ, कांग्रेस गरीबों के साथ"

12, 2, 2026

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दावणगेरे (2 अप्रैल 2026): चुनावी अभियान के बीच पत्रकारों से बात करते हुए सिद्धरमैया ने भाजपा के 'आर्थिक मॉडल' पर सवाल उठाए और अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।

1. आर्थिक मॉडल और कल्याणकारी योजनाएं:

  • अमीरों बनाम गरीबों की लड़ाई: सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि भाजपा का मॉडल केवल धनवानों को लाभ पहुँचाता है, जबकि कांग्रेस वंचितों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है।

  • बजट और खर्च: उन्होंने बताया कि सरकार अपनी प्रमुख गारंटी योजनाओं पर हर साल लगभग 52,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

  • कुल व्यय: मुख्यमंत्री के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक इन योजनाओं पर कुल 1.31 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिससे करोड़ों परिवारों को सीधा लाभ मिला है।


2. 'दिवालियापन' के दावों को खारिज किया:

भाजपा के उन आरोपों पर कि इन योजनाओं से कर्नाटक दिवालिया हो जाएगा, सिद्धरमैया ने कड़ा जवाब दिया:

  • अनुमेय सीमा: उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा लिया गया कर्ज तय कानूनी सीमा (Permissible limits) के भीतर ही है।

  • विकास बनाम लूट: उन्होंने पिछली भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने चार साल सत्ता में रहकर कोई विकास कार्य नहीं किया और केवल राज्य के संसाधनों को "लूटा"।


3. 'श्वेत पत्र' (White Paper) की मांग पर पलटवार:

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र द्वारा राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र की मांग का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:

  • बजट ही श्वेत पत्र है: "जब बजट के सभी विवरण सार्वजनिक हैं और विधानसभा में उन पर साढ़े चार घंटे तक बहस हो चुकी है, तो फिर से श्वेत पत्र की क्या आवश्यकता है? बजट स्वयं में एक पारदर्शी दस्तावेज है।"


4. चुनावी माहौल और जनता की प्रतिक्रिया:

  • उम्मीद से बेहतर समर्थन: सिद्धरमैया ने दावा किया कि वर्तमान चुनाव प्रचार में जनता की प्रतिक्रिया उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक सकारात्मक है।

  • जागरूक मतदाता: उन्होंने कहा कि लोग अब जागरूक हो चुके हैं और भाजपा के "खाली वादों" को समझ चुके हैं।


निष्कर्ष:

दावणगेरे दक्षिण में सिद्धरमैया का यह आक्रामक रुख दर्शाता है कि कांग्रेस कर्नाटक में अपनी 'कल्याणकारी राजनीति' (Welfare Politics) को ही मुख्य चुनावी हथियार बनाए रखेगी। भाजपा द्वारा वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों को उन्होंने आंकड़ों के जरिए 'चुनावी स्टंट' करार देकर खारिज कर दिया है।

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