गोवा उपचुनाव पर हाईकोर्ट में रार: '10 महीने के कार्यकाल के लिए चुनाव क्यों?'; फैसला सुरक्षित
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गोवा उपचुनाव पर हाईकोर्ट में रार: '10 महीने के कार्यकाल के लिए चुनाव क्यों?'; फैसला सुरक्षित

12, 2, 2026

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पणजी (3 अप्रैल 2026): गोवा की पोंडा विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की वैधता को लेकर बम्बई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ में कानूनी जंग तेज हो गई है। न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित जमसंदेकर की खंडपीठ ने इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

खबर के मुख्य बिंदु:

  • विवाद की जड़: तत्कालीन कृषि मंत्री रवि नाइक के निधन के बाद खाली हुई पोंडा सीट पर 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। याचिकाकर्ताओं (स्थानीय मतदाताओं) का तर्क है कि नए विधायक का कार्यकाल 1 साल से कम (मात्र 10 महीने) होगा, जो कि कानून के खिलाफ है।

  • क्या कहता है कानून?: याचिकाकर्ता के वकील नितिन सरदेसाई ने दलील दी कि यदि रिक्त सीट का शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम बचा हो, तो वहां उपचुनाव नहीं कराया जा सकता। गोवा विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त हो रहा है।

  • देरी पर सवाल: रवि नाइक का निधन अक्टूबर 2025 में हुआ था। याचिका में सवाल उठाया गया है कि चुनाव कराने में इतनी देरी क्यों की गई कि अब शेष कार्यकाल एक वर्ष से भी कम रह गया है।

  • याचिकाकर्ता का दावा: इस उपचुनाव को 'अवैध, मनमाना और असंवैधानिक' बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है ताकि सरकारी खजाने और संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सके।


निष्कर्ष:

अब सबकी निगाहें बम्बई हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। यदि अदालत चुनाव रोकने का आदेश देती है, तो यह निर्वाचन आयोग के लिए एक बड़ा झटका होगा। वहीं, यदि चुनाव होते हैं, तो पोंडा को एक साल से भी कम समय के लिए नया प्रतिनिधि मिलेगा।

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