संसद से 'जन विश्वास विधेयक 2026' को मिली मंजूरी; छोटे अपराधों के लिए अब नहीं होगी जेल, 79 कानूनों में बड़ा बदलाव
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संसद से 'जन विश्वास विधेयक 2026' को मिली मंजूरी; छोटे अपराधों के लिए अब नहीं होगी जेल, 79 कानूनों में बड़ा बदलाव

12, 2, 2026

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'भय नहीं, भरोसे की संस्कृति' से बनेगा विकसित भारत: पीयूष गोयल

नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारत में कारोबार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए संसद ने 'जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026' को पारित कर दिया है। लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी। इस कानून के तहत 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन कर छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।

खबर के मुख्य बिंदु:

  • सुधरने का मौका: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदन में कहा कि यह कानून 'गलती' और 'अपराध' के बीच अंतर करता है। अब छोटी तकनीकी खामियों पर जेल भेजने के बजाय चेतावनी या जुर्माने का प्रावधान होगा।

  • स्टार्टअप्स को राहत: देश में 3 लाख से अधिक स्टार्टअप्स हैं। मंत्री ने कहा कि युवा उद्यमियों से होने वाली छोटी प्रक्रियात्मक गलतियों के लिए उन्हें अदालती चक्कर और शर्मिंदगी से बचाना इस कानून का मुख्य उद्देश्य है।

  • प्रमुख बदलाव: * 57 प्रावधानों से कारावास (Jail) की सजा हटा दी गई है।

    • 158 प्रावधानों से भारी जुर्माना हटाया गया है।

    • मोटर वाहन अधिनियम के तहत अब ड्राइविंग लाइसेंस समाप्त होने के बाद 30 दिनों की छूट अवधि मिलेगी।

  • दवाओं पर स्पष्टीकरण: पीयूष गोयल ने साफ किया कि नकली दवाओं (Spurious Drugs) के निर्माण या बिक्री से संबंधित सजा में कोई ढील नहीं दी गई है। केवल होम्योपैथिक या आयुष दवाओं पर नाम न छपने जैसी 'प्रक्रियात्मक' कमियों को सरल बनाया गया है।

किन कानूनों पर पड़ेगा असर?

इस विधेयक के जरिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, रेलवे अधिनियम, खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम और दिल्ली पुलिस अधिनियम सहित दर्जनों कानूनों में सुधार किया गया है।

निष्कर्ष: सरकार का मानना है कि 1,000 से अधिक प्रावधानों के सरलीकरण से आम लोगों और छोटे व्यापारियों का अदालतों पर बोझ कम होगा और देश में 'कल्चर ऑफ ट्रस्ट' पैदा होगा।

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