उत्तराखंड के जंगलों पर 'होपलो' कीट का कहर: देहरादून में साल के 19,000 से अधिक पेड़ काटने की तैयारी; सरकार ने मांगी केंद्र से अनुमति
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उत्तराखंड के जंगलों पर 'होपलो' कीट का कहर: देहरादून में साल के 19,000 से अधिक पेड़ काटने की तैयारी; सरकार ने मांगी केंद्र से अनुमति

12, 2, 2026

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36 साल बाद थानो और झाझरा रेंज में 'साल बोरर' का हमला; पारिस्थितिकी तंत्र पर मंडराया खतरा

ऋषिकेश (3 अप्रैल 2026): उत्तराखंड के देहरादून वन प्रभाग में 'साल' के कीमती जंगलों पर ‘होपलो सिरेंबिक्स स्पाइनिकॉर्निस’ (साल बोरर) नामक घातक कीट ने बड़ा हमला किया है। राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने जानकारी दी है कि थानो, आशारोड़ी और झाझरा रेंज में लगभग 19,170 पेड़ इस कीट के लार्वा से बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं, जिन्हें काटने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई है।

खबर के मुख्य बिंदु:

  • अंदर से खोखले हो रहे पेड़: विशेषज्ञों के अनुसार, होपलो कीट के लार्वा साल के पेड़ों की जड़ों और तने के 'जाइलम' ऊतकों को काटकर उन्हें अंदर से पूरी तरह खोखला कर देते हैं, जिससे पेड़ सूख जाते हैं।

  • क्या है 'ट्री ट्रैप ऑपरेशन'?: बरसात के मौसम में प्रभावित पेड़ों को बचाने के लिए यह अभियान चलाया जाएगा। इसमें साल के लठ्ठों की गंध से कीटों को आकर्षित कर उन्हें नष्ट किया जाता है। इस काम में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों की मदद ली जाएगी।

  • पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन: विशेषज्ञों का मानना है कि कठफोड़वा (Woodpecker) पक्षी की कमी इस कीट के बढ़ने का एक मुख्य कारण हो सकती है, क्योंकि यह पक्षी प्राकृतिक रूप से इन कीटों का शिकार करता है।

  • जलवायु परिवर्तन का असर: देहरादून में 1990 के दशक के बाद यह हमला अब 36 साल बाद दोबारा देखा गया है। पिछले वर्ष की अतिवृष्टि (Heavy Rainfall) और जलवायु परिवर्तन को इस प्रकोप के पीछे के संभावित कारणों में गिना जा रहा है।

निष्कर्ष: वन अनुसंधान संस्थान (FRI) की टीम ने विस्तृत सर्वे के बाद इन पेड़ों को चिन्हित किया है। वन मंत्री ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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