विदेशी धरती पर हर दिन 20 से ज्यादा भारतीयों की मौत; राज्यसभा में सरकार ने पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े
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विदेशी धरती पर हर दिन 20 से ज्यादा भारतीयों की मौत; राज्यसभा में सरकार ने पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े

12, 2, 2026

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खाड़ी देशों में सबसे बुरा हाल; पिछले 5 वर्षों में 37,000 से अधिक भारतीय श्रमिकों ने गंवाई जान

नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): विदेशों में आजीविका की तलाश में गए भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर संसद में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। राज्यसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों (2021-2025) में औसतन प्रतिदिन 20 से अधिक भारतीयों की मृत्यु विदेशी धरती पर हुई है। इनमें से अधिकांश मौतें खाड़ी देशों (Gulf Countries) में दर्ज की गई हैं।

खबर के मुख्य बिंदु:

  • मौतों का डरावना आंकड़ा: विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के लिखित उत्तर के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच कुल 37,740 भारतीय श्रमिकों की मौत हुई। 2021 में सबसे अधिक 8,234 मामले सामने आए थे।

  • खाड़ी देश बने 'डेथ ज़ोन': कुल मौतों में से 86% अकेले खाड़ी देशों में हुई हैं। संयुक्त अरब अमीरात (12,380) और सऊदी अरब (11,757) इस सूची में सबसे ऊपर हैं। कुवैत, ओमान और कतर में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

  • शोषण की हजारों शिकायतें: इसी अवधि के दौरान भारतीय मिशनों को शोषण और दुर्व्यवहार की 80,985 शिकायतें प्राप्त हुईं। सबसे अधिक शिकायतें UAE, कुवैत और ओमान से आईं।

  • श्रमिकों की प्रमुख समस्याएं: रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय श्रमिकों को वेतन न मिलना, पासपोर्ट जब्त कर लेना, बिना छुट्टी के अधिक काम कराना और कंपनियों के अचानक बंद होने जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

  • म्यांमा और कंबोडिया में संकट: म्यांमा में हालांकि कोई मौत दर्ज नहीं हुई, लेकिन वहां से शोषण की 2,548 शिकायतें मिलीं, जो कार्यस्थल पर बढ़ते तनाव को दर्शाती हैं।

सरकार का पक्ष:

विदेश राज्य मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने कई देशों के साथ श्रम सहयोग समझौते (MoUs) किए हैं और संकट की स्थिति में भारतीय मिशन संबंधित देशों के अधिकारियों के साथ मिलकर तुरंत सहायता प्रदान करते हैं।

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