संसद में हाई-वोल्टेज ड्रामा: महिला आरक्षण और 861 लोकसभा सीटों के लिए सरकार लाएगी 'विशेष बिल'; विपक्ष ने बताया 'चुनावी स्टंट'
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संसद में हाई-वोल्टेज ड्रामा: महिला आरक्षण और 861 लोकसभा सीटों के लिए सरकार लाएगी 'विशेष बिल'; विपक्ष ने बताया 'चुनावी स्टंट'

12, 2, 2026

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बजट सत्र का विस्तार: महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन को अलग करने की तैयारी

नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारतीय संसदीय इतिहास में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने और लोकसभा की सीटों को 546 से बढ़ाकर 861 करने के उद्देश्य से एक 'अत्यंत महत्वपूर्ण' विधेयक लाने का मन बना लिया है। इसी कारण राज्यसभा की कार्यवाही को आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बजाय 16 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

खबर के मुख्य बिंदु:

  • सरकार का मास्टरप्लान: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बताया कि अगले 2-3 हफ्तों में सरकार एक विशेष विधेयक पेश करेगी। इसका उद्देश्य जनगणना से जुड़े परिसीमन (Delimitation) को महिला आरक्षण से अलग करना है ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके।

  • विपक्ष का 'दबंगई' वाला आरोप: नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे "दबंगई" करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इतने समय तक इस बिल पर क्यों सोई रही और अब ऐन चुनाव के वक्त इसे क्यों ला रही है?

  • आचार संहिता का पेंच: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, वहां आचार संहिता लागू है। सरकार चुनावी लाभ लेने के लिए जानबूझकर इस समय विधेयक लाना चाहती है। विपक्ष की मांग है कि सर्वदलीय बैठक 29 अप्रैल के बाद बुलाई जाए।

  • सत्तापक्ष की दलील: सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने स्पष्ट किया कि विधायी कार्य कब और कैसे करना है, यह तय करना सरकार का अधिकार है। वहीं रीजीजू ने कहा कि यह महिलाओं के प्रति देश की प्रतिबद्धता है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

  • ओबीसी आरक्षण की मांग: आरजेडी के मनोज झा ने आरक्षित सीटों के भीतर SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग से कोटा स्पष्ट करने की मांग की है।

निष्कर्ष: यदि यह विधेयक पारित होता है, तो न केवल महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा, बल्कि संसद का स्वरूप भी पूरी तरह बदल जाएगा। 16 अप्रैल से शुरू होने वाला सत्र काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं।

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