'नागरिक देवो भव:' प्रशासन का नया मंत्र; पीएम मोदी ने लोकसेवकों को दिया 'कर्मयोगी' बनने का संदेश
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'नागरिक देवो भव:' प्रशासन का नया मंत्र; पीएम मोदी ने लोकसेवकों को दिया 'कर्मयोगी' बनने का संदेश

12, 2, 2026

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प्रशासनिक सुधारों पर प्रधानमंत्री का जोर; कहा- 'अधिकारी' नहीं, 'कर्तव्य' भावना से काम करें लोकसेवक

नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को 'साधना सप्ताह' (SADHNA Saptah) के शुभारंभ पर देश के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का आह्वान किया। वीडियो संदेश के माध्यम से लोकसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक भारत की शासन व्यवस्था का मूल आधार ‘नागरिक देवो भव:’ होना चाहिए।

खबर के मुख्य बिंदु:

  • शासन का नया मानदंड: पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी शासन व्यवस्था की सफलता का पैमाना नागरिकों के जीवन की सुगमता (Ease of Living) और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। उन्होंने लोकसेवकों से हर निर्णय को 'कर्तव्य भावना' की कसौटी पर कसने का आग्रह किया।

  • 'अधिकारी' से 'कर्मयोगी' का सफर: प्रधानमंत्री ने पुरानी प्रशासनिक संस्कृति पर प्रहार करते हुए कहा कि पहले 'अधिकारी' होने पर अहंकार अधिक था, लेकिन अब ध्यान पूरी तरह सेवा पर है। उन्होंने क्षमता विकास आयोग (CBC) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह हर सरकारी कर्मचारी को 'कर्मयोगी' के रूप में सशक्त बना रहा है।

  • टेक्नोलॉजी और AI की भूमिका: बदलते समय के साथ कदम मिलाने के लिए पीएम ने तकनीक और डेटा की गहरी समझ को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने से शासन और सेवा वितरण (Service Delivery) में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे, जिसके लिए लोकसेवकों को तैयार रहना होगा।

  • राज्यों के बीच की खाई को पाटना: संघीय ढांचे पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि अब "पिछड़े" या "बीमारू" राज्य जैसी श्रेणियों को खत्म करने का समय आ गया है। विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब सभी राज्य साझा समझ और 'समग्र सरकार' (Whole of Government) के दृष्टिकोण के साथ मिलकर काम करेंगे।

  • साधना सप्ताह क्या है?: इसका आयोजन क्षमता विकास आयोग द्वारा 2 से 8 अप्रैल तक किया जा रहा है। यह भारत के सिविल सेवा तंत्र में क्षमता निर्माण का सबसे बड़ा सामूहिक प्रयास है, जो 'मिशन कर्मयोगी' के तहत संचालित होता है।

निष्कर्ष: प्रधानमंत्री ने लोकसेवकों को याद दिलाया कि स्थानीय सरकारी दफ्तर ही जनता के लिए सरकार का चेहरा होता है। इसलिए, अधिकारियों का व्यवहार लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को मजबूत करने वाला होना चाहिए।

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