जन विश्वास विधेयक 2026' पर राज्यसभा में रार: विपक्ष ने बताया 'कॉरपोरेट परस्त', दोबारा प्रवर समिति भेजने की मांग
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जन विश्वास विधेयक 2026' पर राज्यसभा में रार: विपक्ष ने बताया 'कॉरपोरेट परस्त', दोबारा प्रवर समिति भेजने की मांग

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): मामूली प्रक्रियात्मक त्रुटियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाले ‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026’ पर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार हुई। विपक्ष का आरोप है कि यह बिल आम जनता के बजाय बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुँचाने के लिए लाया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • विपक्ष का तर्क: राजद सांसद मनोज झा ने आरोप लगाया कि फार्मा और MSME क्षेत्र में ढील देने से गुणवत्ता के साथ समझौता होगा। सपा के रामजीलाल सुमन ने कहा कि इससे अधिकारियों की शक्तियां बढ़ेंगी।

  • सरकार का पक्ष: भाजपा सांसदों ने इसे 'भरोसे की संस्कृति' (Culture of Trust) और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की सोच वाला बिल बताया, जो व्यापार को आसान बनाएगा।

  • बड़ा बदलाव: इस बिल के जरिए 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन कर 1,000 से अधिक छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाया जा रहा है।

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