रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच बिजली संकट की आहट: उत्तर भारत में मांग 250 गीगावाट के पार; राज्यों को 'पावर कट' के लिए तैयार रहने के निर्देश
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रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच बिजली संकट की आहट: उत्तर भारत में मांग 250 गीगावाट के पार; राज्यों को 'पावर कट' के लिए तैयार रहने के निर्देश

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): अप्रैल की शुरुआत में ही भीषण लू (Heatwave) के चलते उत्तर भारत के राज्यों में बिजली की मांग ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रिड पर कुल मांग 250 गीगावाट (GW) के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई है, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भारी दबाव है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • कोयला स्टॉक की स्थिति: हालांकि सरकार का दावा है कि थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन रेलवे रैक की उपलब्धता में कमी के कारण कुछ राज्यों (विशेषकर पंजाब और राजस्थान) में 'कोयला संकट' की स्थिति बन रही है।

  • ग्रिड स्थिरता का खतरा: मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर के कारण ग्रिड की फ्रीक्वेंसी में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ग्रिड को क्रैश होने से बचाने के लिए कई राज्यों में 3-4 घंटे की 'रोलिंग कटौती' शुरू कर दी गई है।

  • नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका: दोपहर के समय सौर ऊर्जा (Solar Energy) से ग्रिड को बड़ी राहत मिल रही है, लेकिन शाम ढलते ही जब एसी और कूलरों का लोड बढ़ता है, तो बिजली की कमी (Peak Shortage) गहराने लगती है।

  • भविष्य की चेतावनी: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मई-जून में तापमान 48 डिग्री तक पहुँचता है, तो मांग 280 गीगावाट तक जा सकती है। इसके लिए सरकार अब 'गैस आधारित पावर प्लांटों' को पूरी क्षमता पर चलाने की योजना बना रही है।

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