एआई (AI) का भारतीय जॉब मार्केट पर बड़ा असर: आईटी और बीपीओ (BPO) सेक्टर में 20% नई भर्तियों में कमी; 'री-स्किलिंग' बनी अनिवार्य
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एआई (AI) का भारतीय जॉब मार्केट पर बड़ा असर: आईटी और बीपीओ (BPO) सेक्टर में 20% नई भर्तियों में कमी; 'री-स्किलिंग' बनी अनिवार्य

12, 2, 2026

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बेंगलुरु/नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। नासकॉम (NASSCOM) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जेनेरेटिव एआई (Generative AI) के बढ़ते उपयोग के कारण एंट्री-लेवल कोडिंग और बीपीओ सेक्टर की नई भर्तियों में 20-25% की गिरावट दर्ज की गई है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • स्वचालन (Automation) का बढ़ता प्रभाव: डेटा एंट्री, बेसिक सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और कस्टमर सपोर्ट जैसे काम अब एआई टूल्स द्वारा किए जा रहे हैं। इससे कंपनियों की कार्यक्षमता तो बढ़ी है, लेकिन ताज़ा स्नातकों (Freshers) के लिए रोजगार के अवसर कम हुए हैं।

  • नए अवसरों का उदय: सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि एआई प्रॉम्प्ट इंजीनियर्स, डेटा क्यूरेटर्स और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग में 40% की भारी वृद्धि हुई है। अब कंपनियां 'सामान्य कोडर' के बजाय 'एआई-साक्षर' पेशेवर ढूंढ रही हैं।

  • सरकार का 'इंडिया एआई' मिशन: भारत सरकार ने ₹10,000 करोड़ के बजट के साथ स्किलिंग प्रोग्राम शुरू किया है। इसका उद्देश्य युवाओं को एआई के साथ काम करने के लिए प्रशिक्षित करना है ताकि वे तकनीक के कारण विस्थापित न हों।

  • वेतन में अंतर: रिपोर्ट बताती है कि जिन कर्मचारियों ने खुद को एआई टूल्स के साथ 'अपस्किल' (Upskill) किया है, उनके वेतन में पिछले वर्ष की तुलना में 30% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।

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