डिजिटल इकोनॉमी में नया अध्याय: भारत में 'ई-रुपया' (e-Rupee) का उपयोग 300% बढ़ा; अब ऑफलाइन भुगतान और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स की भी सुविधा
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डिजिटल इकोनॉमी में नया अध्याय: भारत में 'ई-रुपया' (e-Rupee) का उपयोग 300% बढ़ा; अब ऑफलाइन भुगतान और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स की भी सुविधा

12, 2, 2026

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मुंबई/नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू की गई सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC), जिसे 'ई-रुपया' के नाम से जाना जाता है, ने भारतीय वित्तीय बाजार में अपनी पैठ मजबूत कर ली है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में ई-रुपये के दैनिक लेनदेन में 300% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • ऑफलाइन भुगतान की सुविधा: आरबीआई ने अब 'ई-रुपये' के लिए ऑफलाइन मोड लॉन्च कर दिया है। इसका मतलब है कि बिना इंटरनेट वाले इलाकों या दूरदराज के गांवों में भी नागरिक केवल 'टैप-एंड-पे' तकनीक के जरिए डिजिटल करेंसी से भुगतान कर सकेंगे।

  • स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स: ई-रुपये का सबसे बड़ा लाभ इसके 'प्रोग्रामेबल' होने में है। अब सरकार सब्सिडी या कृषि सहायता सीधे ई-रुपये के रूप में दे रही है, जिसे केवल विशिष्ट उद्देश्यों (जैसे खाद या बीज खरीदने) के लिए ही खर्च किया जा सकेगा। इससे भ्रष्टाचार और फंड के दुरुपयोग पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

  • यूपीआई (UPI) के साथ इंटरऑपरेबिलिटी: अब ग्राहक किसी भी मर्चेंट के यूपीआई क्यूआर कोड (QR Code) को ई-रुपये ऐप से स्कैन करके भुगतान कर सकते हैं। इस एकीकरण ने डिजिटल करेंसी को आम जनता के लिए बेहद सुलभ बना दिया है।

  • नकद रहित भविष्य: विशेषज्ञों का मानना है कि ई-रुपया आने वाले 5 वर्षों में भौतिक नोटों (Physical Cash) की छपाई और प्रबंधन लागत में सरकार के हजारों करोड़ रुपये बचाएगा।

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