अंतरिक्ष से सीधे आएगी बिजली! इसरो (ISRO) और डीआरडीओ ने शुरू किया 'स्पेस सोलर पावर' प्रोजेक्ट; 24 घंटे ऊर्जा संकट से मिलेगी मुक्ति
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अंतरिक्ष से सीधे आएगी बिजली! इसरो (ISRO) और डीआरडीओ ने शुरू किया 'स्पेस सोलर पावर' प्रोजेक्ट; 24 घंटे ऊर्जा संकट से मिलेगी मुक्ति

12, 2, 2026

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बेंगलुरु/हैदराबाद (3 अप्रैल 2026): ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत ने एक भविष्यवादी और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'स्पेस-बेस्ड सोलर पावर' (SBSP) पर काम शुरू कर दिया है। इसरो प्रमुख और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने घोषणा की है कि वे अंतरिक्ष में विशाल सोलर पैनल स्थापित करेंगे जो सूर्य की ऊर्जा को माइक्रोवेव के जरिए सीधे पृथ्वी पर भेजेंगे।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • 24 घंटे बिजली की गारंटी: पृथ्वी पर सोलर पैनल रात के समय या बादलों के कारण बिजली नहीं बना पाते, लेकिन अंतरिक्ष में सूर्य की रोशनी 24 घंटे उपलब्ध रहती है। इस तकनीक से बिना किसी रुकावट के असीमित बिजली प्राप्त की जा सकेगी।

  • वायरलेस बिजली ट्रांसमिशन: यह प्रोजेक्ट डीआरडीओ की 'वायरलेस पावर ट्रांसमिशन' तकनीक पर आधारित है। अंतरिक्ष से आने वाली ऊर्जा को पृथ्वी पर मौजूद विशेष 'रेक्टेना' (Rectenna) स्टेशनों द्वारा रिसीव किया जाएगा।

  • लागत और चुनौती: हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है और इसमें भारी निवेश की आवश्यकता है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि 2035 तक भारत का पहला प्रायोगिक स्पेस सोलर स्टेशन काम करना शुरू कर देगा।

  • पर्यावरण के अनुकूल: यह पूरी तरह से कार्बन-मुक्त ऊर्जा होगी, जो जीवाश्म ईंधन (कोयला और गैस) पर भारत की निर्भरता को समाप्त कर देगी।

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