ब्रह्मोस' के बाद अब 'तेजस' की बारी: फिलीपींस और अर्जेंटीना के साथ ₹25,000 करोड़ का रक्षा सौदा अंतिम चरण में; भारत बना ग्लोबल डिफेंस हब

ब्रह्मोस' के बाद अब 'तेजस' की बारी: फिलीपींस और अर्जेंटीना के साथ ₹25,000 करोड़ का रक्षा सौदा अंतिम चरण में; भारत बना ग्लोबल डिफेंस हब

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारत अब रक्षा उपकरणों के 'आयातक' से 'निर्यातक' बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत का वार्षिक रक्षा निर्यात ₹35,000 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है। अब 'तेजस' (LCA Tejas) लड़ाकू विमानों के लिए कई देशों ने अपनी रुचि दिखाई है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • तेजस का वैश्विक बाजार: अर्जेंटीना और मिस्र के साथ तेजस विमानों की आपूर्ति के लिए बातचीत अंतिम दौर में है। स्वदेशी तकनीक और कम रखरखाव लागत के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण अमेरिका के देश भारतीय लड़ाकू विमानों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  • ब्रह्मोस और पिनाका: फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की सफल आपूर्ति के बाद अब वियतनाम और इंडोनेशिया ने भी इसमें रुचि दिखाई है। साथ ही, 'पिनाका' रॉकेट सिस्टम की मांग आर्मेनिया जैसे देशों में तेजी से बढ़ी है।

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: टाटा, रिलायंस डिफेंस और एलएंडटी जैसी निजी कंपनियां अब अत्याधुनिक ड्रोन और रडार प्रणालियों का निर्माण कर रही हैं, जिन्हें वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है।

  • सामरिक महत्व: रक्षा निर्यात बढ़ने से न केवल अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र और अफ्रीका में भारत का कूटनीतिक प्रभाव भी बढ़ रहा है।

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