चिप' का वैश्विक केंद्र बनता भारत: गुजरात और असम के सेमीकंडक्टर प्लांट से 'मेड इन इंडिया' चिप्स का उत्पादन शुरू; आयात पर निर्भरता 40% कम

चिप' का वैश्विक केंद्र बनता भारत: गुजरात और असम के सेमीकंडक्टर प्लांट से 'मेड इन इंडिया' चिप्स का उत्पादन शुरू; आयात पर निर्भरता 40% कम

12, 2, 2026

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धोलेरा/नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में अपनी सबसे बड़ी बाधा को पार कर लिया है। गुजरात के धोलेरा और असम के मोरीगांव में स्थापित सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) यूनिट्स से 'मेड इन इंडिया' चिप्स की पहली खेप बाहर आ गई है। प्रधानमंत्री ने इसे 'विकसित भारत' की दिशा में एक ऐतिहासिक क्षण बताया है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • आयात में कटौती: अब तक भारत अपनी 90% चिप जरूरतों के लिए ताइवान और चीन पर निर्भर था। घरेलू उत्पादन शुरू होने से स्मार्टफोन, लैपटॉप और कारों की कीमतों में 10-15% की कमी आने की उम्मीद है।

  • टाटा और माइक्रोन का योगदान: टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और अमेरिकी कंपनी माइक्रोन (Micron) ने मिलकर ₹1.5 लाख करोड़ का निवेश किया है। ये प्लांट अब आधुनिक 28nm और 40nm चिप्स बना रहे हैं, जिनका उपयोग घरेलू खपत के साथ-साथ निर्यात के लिए भी किया जाएगा।

  • रोजगार सृजन: सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास से देश में 1 लाख प्रत्यक्ष और 3 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। भारत अब 'चिप डिजाइन' के साथ-साथ 'चिप निर्माण' में भी अपनी धाक जमा रहा है।

  • रणनीतिक महत्व: वैश्विक सप्लाई चेन में भारत अब ताइवान का एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है, जिससे अमेरिका और यूरोप की बड़ी टेक कंपनियां भारत की ओर आकर्षित हो रही हैं।

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