ग्रीन हाइड्रोजन' का पावरहाउस बना भारत: लद्दाख में देश का पहला कमर्शियल ग्रीन हाइड्रोजन स्टेशन शुरू; शून्य उत्सर्जन वाली बसों का संचालन शुरू

ग्रीन हाइड्रोजन' का पावरहाउस बना भारत: लद्दाख में देश का पहला कमर्शियल ग्रीन हाइड्रोजन स्टेशन शुरू; शून्य उत्सर्जन वाली बसों का संचालन शुरू

12, 2, 2026

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लेह/नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारत ने अपने 'नेट जीरो 2070' लक्ष्य की ओर एक बड़ी छलांग लगाई है। लद्दाख की ऊंचाई वाली पहाड़ियों में देश का पहला व्यावसायिक ग्रीन हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशन और सोलर प्लांट शुरू हो गया है। एनटीपीसी (NTPC) द्वारा संचालित यह प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे ऊंचे ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स में से एक है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • शून्य उत्सर्जन परिवहन: लद्दाख में अब हाइड्रोजन से चलने वाली बसों का बेड़ा तैनात किया गया है। ये बसें पानी के अणुओं को तोड़कर बनाई गई हाइड्रोजन गैस से चलती हैं और धुएं के बजाय केवल 'जल वाष्प' (Water Vapor) छोड़ती हैं।

  • कठिन परिस्थितियों में सफलता: शून्य से नीचे के तापमान (-20°C) में भी हाइड्रोजन फ्यूल सेल का सफल संचालन भारतीय इंजीनियरों की बड़ी तकनीकी जीत है। यह मॉडल अब हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में लागू किया जाएगा।

  • ग्रीन अमोनिया निर्यात: भारत अब न केवल घरेलू खपत के लिए हाइड्रोजन बना रहा है, बल्कि 'ग्रीन अमोनिया' के रूप में इसे जर्मनी और जापान जैसे देशों को निर्यात करने के समझौते भी कर चुका है।

  • सब्सिडी और निवेश: सरकार ने 'इलेक्ट्रोलाइजर' निर्माण के लिए ₹17,000 करोड़ की पीएलआई (PLI) योजना शुरू की है, जिससे भारत हाइड्रोजन उत्पादन की लागत $1 प्रति किलोग्राम तक लाने का प्रयास कर रहा है।

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