कचरे से कंचन': भारत के 100 शहरों में शुरू हुआ 'प्लास्टिक टू रोड' प्रोजेक्ट; अब खराब प्लास्टिक से बनेंगी नेशनल हाईवेज की सड़कें

कचरे से कंचन': भारत के 100 शहरों में शुरू हुआ 'प्लास्टिक टू रोड' प्रोजेक्ट; अब खराब प्लास्टिक से बनेंगी नेशनल हाईवेज की सड़कें

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): पर्यावरण संरक्षण और सड़क निर्माण में एक क्रांतिकारी प्रयोग करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय (NHAI) ने 'प्लास्टिक सड़कों' के विस्तार को मंजूरी दे दी है। अब भारत के नेशनल हाईवेज के निर्माण में बिटुमेन (डामर) के साथ 10% रिसाइकिल प्लास्टिक का मिश्रण अनिवार्य कर दिया गया है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • सड़कों की लंबी उम्र: वैज्ञानिकों का दावा है कि प्लास्टिक मिश्रित सड़कें पारंपरिक सड़कों की तुलना में अधिक टिकाऊ होती हैं। ये सड़कें भारी बारिश और गर्मी को झेलने में सक्षम हैं और इनमें 'पोटहोल्स' (गड्ढे) होने की संभावना 50% कम हो जाती है।

  • कचरा प्रबंधन की समस्या का हल: इस तकनीक से हर 1 किलोमीटर की सड़क बनाने में लगभग 1 टन प्लास्टिक कचरे का उपयोग हो रहा है। इससे लैंडफिल साइट्स पर प्लास्टिक का बोझ कम हो रहा है और पर्यावरण प्रदूषण पर लगाम लग रही है।

  • आर्थिक लाभ: प्लास्टिक का उपयोग करने से सड़क निर्माण की लागत में 5-7% की कमी आई है, क्योंकि बिटुमेन जैसे महंगे कच्चे तेल के उत्पाद की खपत कम हुई है।

  • विश्व स्तरीय उदाहरण: भारत ने अब तक 50,000 किमी से अधिक प्लास्टिक सड़कें बना ली हैं, जिसकी सराहना विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठनों ने भी की है।

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