बैंकिंग अब दरवाजे पर: भारत के 6 लाख गांवों में पहुँचे 'आधार सक्षम' माइक्रो-एटीएम; अब अंगूठे के निशान से घर बैठे होगा बैंक का सारा काम

बैंकिंग अब दरवाजे पर: भारत के 6 लाख गांवों में पहुँचे 'आधार सक्षम' माइक्रो-एटीएम; अब अंगूठे के निशान से घर बैठे होगा बैंक का सारा काम

12, 2, 2026

1

image

नयी दिल्ली/रांची (3 अप्रैल 2026): ग्रामीण भारत में बैंकिंग के स्वरूप को बदलने के लिए सरकार ने 'आधार सक्षम भुगतान प्रणाली' (AePS) और माइक्रो-एटीएम (Micro-ATMs) का जाल बिछा दिया है। अब देश का शायद ही कोई ऐसा गांव बचा हो जहां बैंकिंग सेवाएं पैदल दूरी पर उपलब्ध न हों।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • बैंक सखी और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट: गांवों में अब लाखों 'बैंक सखी' और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट तैनात हैं, जो एक छोटे से हैंडहेल्ड डिवाइस (Micro-ATM) के जरिए नकद निकासी, जमा और फंड ट्रांसफर की सुविधा दे रहे हैं।

  • डीबीटी (DBT) का सीधा लाभ: पेंशन, किसान सम्मान निधि और मनरेगा की मजदूरी अब सीधे लाभार्थी के अंगूठे के निशान से उनके घर के पास ही मिल रही है। बुजुर्गों और दिव्यांगों को अब बैंक जाने के लिए मीलों पैदल नहीं चलना पड़ता।

  • सुरक्षा और पारदर्शिता: यह सिस्टम पूरी तरह 'बायोमेट्रिक' आधारित है, जिससे धोखाधड़ी की संभावना शून्य हो गई है। लेन-देन के तुरंत बाद ग्राहक को एसएमएस और रसीद प्राप्त होती है।

  • नया ग्रामीण बाजार: माइक्रो-एटीएम की सफलता ने गांवों में छोटे व्यवसायों को बढ़ावा दिया है। अब दुकानदार भी 'कैश-आउट' सेवाएं दे रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह सुचारू हुआ है।

Powered by Froala Editor