न्याय में तेज़ी: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में 'सुवास' (SUVAS) एआई का विस्तार; अब क्षेत्रीय भाषाओं में मिल रहे हैं अदालती फैसले

न्याय में तेज़ी: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में 'सुवास' (SUVAS) एआई का विस्तार; अब क्षेत्रीय भाषाओं में मिल रहे हैं अदालती फैसले

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारतीय न्यायपालिका में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और आम आदमी के लिए कानून को सुलभ बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग अब निर्णायक मोड़ पर है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष एआई टूल 'सुवास' (SUVAS - Supreme Court Vidhik Anuvaad Software) को अब 22 आधिकारिक भाषाओं में अपडेट कर दिया है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • भाषाई बाधा का अंत: अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जटिल अंग्रेजी फैसले मात्र कुछ मिनटों में हिंदी, तमिल, गुजराती और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे मुवक्किलों को अपने वकीलों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता।

  • दस्तावेजों का ऑटोमेशन: एआई अब अदालती दस्तावेजों को स्कैन करके केस की समरी (Summary) तैयार कर रहा है, जिससे जजों का कीमती समय बच रहा है। अनुमान है कि इससे मामलों की सुनवाई की गति में 30% का सुधार हुआ है।

  • वर्चुअल कोर्ट्स: छोटे दीवानी और ट्रैफिक चालान जैसे मामलों के लिए 'एआई-संचालित वर्चुअल कोर्ट' शुरू किए गए हैं, जहाँ शारीरिक उपस्थिति के बिना ही सुनवाई और फैसले हो रहे हैं।

  • डेटा सुरक्षा: मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि एआई केवल 'सहायक' की भूमिका में है, अंतिम फैसला देने का अधिकार हमेशा मानव जजों के पास ही रहेगा, ताकि न्यायिक नैतिकता बनी रहे।

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