ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति: वाराणसी और शिमला के बाद अब 10 और शहरों में शुरू होगा 'अर्बन रोपवे' प्रोजेक्ट; ₹20,000 करोड़ का बजट मंजूर

ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति: वाराणसी और शिमला के बाद अब 10 और शहरों में शुरू होगा 'अर्बन रोपवे' प्रोजेक्ट; ₹20,000 करोड़ का बजट मंजूर

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली/शिमला (3 अप्रैल 2026): घनी आबादी वाले भारतीय शहरों में ट्रैफिक की समस्या को सुलझाने के लिए सरकार अब 'पर्वतमाला परियोजना' के तहत 'अर्बन रोपवे' (Urban Ropeways) पर फोकस कर रही है। वाराणसी में सफल प्रयोग के बाद अब दिल्ली, बेंगलुरु और देहरादून जैसे शहरों के भीड़भाड़ वाले इलाकों में रोपवे को सार्वजनिक परिवहन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: रोपवे उन तंग गलियों और पहाड़ी इलाकों के लिए वरदान साबित हो रहा है जहाँ बस या मेट्रो ले जाना असंभव है। यह मेट्रो के पूरक के रूप में काम करेगा।

  • प्रदूषण मुक्त यात्रा: रोपवे पूरी तरह बिजली से चलते हैं, जिससे शहरों में शोर और वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिल रही है। वाराणसी कैंट से गोदौलिया के बीच रोपवे से अब यात्रा का समय 60 मिनट से घटकर मात्र 15 मिनट रह गया है।

  • भविष्य की योजना: सरकार ने 2026-27 के दौरान 200 किमी से अधिक रोपवे नेटवर्क बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें 'मल्टी-मोडल हब' बनाए जाएंगे जहाँ यात्री सीधे ट्रेन या बस से उतरकर रोपवे ले सकेंगे।

  • पर्यटन और सुविधा: पहाड़ी शहरों (जैसे शिमला और मसूरी) में रोपवे न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण होगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए दैनिक आवाजाही का सबसे सस्ता और तेज़ माध्यम बनेगा।

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