शुक्र ग्रह की ओर भारत के कदम: इसरो (ISRO) ने 'शुक्रयान-1' की लॉन्चिंग विंडो तय की; पहली बार सौरमंडल के सबसे गर्म ग्रह के रहस्यों से उठेगा पर्दा
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शुक्र ग्रह की ओर भारत के कदम: इसरो (ISRO) ने 'शुक्रयान-1' की लॉन्चिंग विंडो तय की; पहली बार सौरमंडल के सबसे गर्म ग्रह के रहस्यों से उठेगा पर्दा

12, 2, 2026

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बेंगलुरु (3 अप्रैल 2026): चंद्रमा और मंगल के बाद अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की नज़र सौरमंडल के सबसे रहस्यमयी ग्रह 'शुक्र' (Venus) पर है। इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने घोषणा की है कि 'शुक्रयान-1' मिशन को दिसंबर 2026 में लॉन्च किया जाएगा।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • मिशन का उद्देश्य: शुक्रयान ग्रह के घने और जहरीले वायुमंडल का अध्ययन करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि शुक्र कभी पृथ्वी जैसा था, लेकिन 'ग्रीनहाउस प्रभाव' ने इसे नर्क बना दिया। इस अध्ययन से पृथ्वी के भविष्य को समझने में मदद मिलेगी।

  • अत्याधुनिक पेलोड: इसरो इसमें 'सिंथेटिक अपर्चर रडार' (SAR) भेज रहा है, जो शुक्र की सतह के नीचे छिपे ज्वालामुखियों और पर्वत श्रृंखलाओं का नक्शा तैयार करेगा, जो बादलों की मोटी परत के कारण साधारण कैमरों से नहीं दिखते।

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: इस मिशन में नासा, फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी और जर्मनी की लैबोरेटरीज़ ने अपने उपकरण (Payloads) लगाए हैं, जो इसरो की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

  • गहरा अंतरिक्ष संचार: मिशन के लिए इसरो ने अपने 'डीप स्पेस नेटवर्क' को और अधिक शक्तिशाली बनाया है ताकि करोड़ों किलोमीटर दूर से हाई-डेफिनेशन डेटा प्राप्त किया जा सके।

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