'इंटीग्रेटेड मेडिसिन' का नया दौर: एम्स (AIIMS) और सभी सरकारी अस्पतालों में शुरू हुए आयुष (AYUSH) विभाग; एलोपैथी और आयुर्वेद से होगा जटिल रोगों का इलाज

'इंटीग्रेटेड मेडिसिन' का नया दौर: एम्स (AIIMS) और सभी सरकारी अस्पतालों में शुरू हुए आयुष (AYUSH) विभाग; एलोपैथी और आयुर्वेद से होगा जटिल रोगों का इलाज

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में एक युगांतकारी परिवर्तन आया है। अब मरीजों को एक ही छत के नीचे आधुनिक एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेद, योग और नेचुरोपैथी की सुविधाएं मिल रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी केंद्रीय अस्पतालों के लिए 'इंटीग्रेटेड मेडिसिन' अनिवार्य कर दी है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • जटिल रोगों में राहत: कैंसर की कीमोथेरेपी के बाद होने वाले 'साइड-इफेक्ट्स' को कम करने के लिए आयुर्वेद का उपयोग और पोस्ट-सर्जरी रिकवरी के लिए योग का सहारा लिया जा रहा है। इसके क्लीनिकल ट्रायल में शानदार नतीजे मिले हैं।

  • जीवनशैली रोगों पर प्रहार: डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों के प्रबंधन के लिए मरीजों को अब केवल दवाएं नहीं, बल्कि 'होलिस्टिक वेलनेस प्लान' दिया जा रहा है, जिससे दवाओं पर निर्भरता 30% तक कम हुई है।

  • ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन: भारत में डब्ल्यूएचओ (WHO) के सहयोग से खुला पारंपरिक चिकित्सा केंद्र अब दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए हब बन गया है, जहाँ जड़ी-बूटियों का वैज्ञानिक मानकीकरण (Standardization) किया जा रहा है।

  • बीमा कवर: अब स्वास्थ्य बीमा कंपनियां आयुष उपचारों के लिए भी पूर्ण क्लेम (Full Claim) दे रही हैं, जिससे आम जनता का भरोसा इस पद्धति पर बढ़ा है।

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