समुद्री कानून और व्यापार (भारत का नया समुद्री संहिता)

समुद्री कानून और व्यापार (भारत का नया समुद्री संहिता)

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारत ने अपने 100 साल पुराने औपनिवेशिक समुद्री कानूनों को बदलकर 'सागर संहिता (Sagar Samhita) 2026' को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने इसे भारतीय समुद्री इतिहास का सबसे बड़ा कानूनी सुधार बताया है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • त्वरित न्याय प्रणाली: नए कानून के तहत मुंबई, कोच्चि और विशाखापत्तनम में विशेष 'समुद्री अधिकरण' (Maritime Tribunals) स्थापित किए गए हैं। अब जहाजों की जब्ती और व्यापारिक विवादों का निपटारा वर्षों के बजाय महीनों में होगा।

  • डिजिटल पंजीकरण: भारतीय झंडे वाले जहाजों का पंजीकरण अब पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। इससे 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' में सुधार होगा और वैश्विक शिपिंग कंपनियां भारत में अपने जहाज पंजीकृत कराने के लिए आकर्षित होंगी।

  • समुद्री पर्यावरण संरक्षण: सागर संहिता में 'तेल रिसाव' (Oil Spill) और समुद्री प्रदूषण फैलाने वाले जहाजों पर भारी जुर्माने और आपराधिक कार्रवाई का कड़ा प्रावधान किया गया है।

  • नाविकों का कल्याण: भारतीय नाविकों (Seafarers) के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार वेतन, बीमा और सुरक्षा की गारंटी दी गई है, जिससे इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं का भरोसा बढ़ा है।

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